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Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने 3 हफ्ते में सरेंडर करने के दिए निर्देश

Jaggi Murder Case: जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने 3 हफ्ते में सरेंडर करने के दिए निर्देश

Jaggi Murder Case

Jaggi Murder Case

Dageshwar Dewangan
Published: 02 Apr 2026 | 12:25 pmModified: 02 Apr 2026 | 12:49 pm
HIGHLIGHTS
  1. हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिया
  2. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट को वापस भेजा
  3. 23 साल पुराना मामला, जिसमें एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की हत्या हुई थी

बिलासपुर: Jaggi Murder Case एनसीपी के नेता रहे रामअवतार जग्गी हत्याकांड की फाइल एक बार फिर खुल गई है। आज हाईकोर्ट में इस मामले में सुनवाई हुई है। जिसमें अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच (डीबी) में सुनाया गया, अब उन्हें तय अवधि के अंदर आत्मसमर्पण करना अनिवार्य होगा।

Jaggi Murder Case बता दें कि कल यानी बुधवार को इस मामले में सुनवाई होनी थी, लेकिन आज तक के लिए टाल दिया गया। जिसके बाद आज इस मामले में सुनवाई हुई है। कोर्ट ने अमित जोगी को 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिए हैं।

कोर्ट के फैसले के ​बाद अमित जोगी ने किया पोस्ट

हाईकोर्ट से अमित जोगी को सरेंडर करने के आदेश के बाद अमित जोगी ने अपने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने लिखा कि 'उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया, बिना मुझे सुनवाई का एक भी अवसर दिए, अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है।

मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है, मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूँ। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूँ। सत्य की जीत अवश्य होगी, आप सभी मेरे लिए प्रार्थना जरूर करें।'

आपको बता दें कि बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में सुनवाई प्रारंभ हो गई है। बीते दिनों चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने सतीश जग्गी व जग्गी हत्याकांड के आरोपी अमित जोगी को नोटिस जारी कर अपने वकील के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। नोटिस की तामिली की जिम्मेदारी रायपुर एसपी काे दी गई थी। याचिकाकर्ता सतीश जग्गी के अधिवक्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए वापस बिलासपुर हाईकोर्ट भेज दिया है।

सीबीआई की ओर से उपस्थित अधिवक्ता वैभव ए. गोवर्धन और राज्य की ओर से उपस्थित उप महाधिवक्ता डॉ. सौरभ पांडे ने संयुक्त रूप से निवेदन किया कि राज्य ने 31 मई 2007 को आवेदन पेश कर निचली अदालत द्वारा पारित बरी करने के फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति मांगी थी। उक्त आवेदन को इस न्यायालय की पीठ ने 18 अगस्त 2011 को इस आधार पर खारिज कर दिया था, सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे मामले में राज्य द्वारा दायर अपील की अनुमति के लिए आवेदन स्वीकार्य नहीं है।

सीबीआई ने याचिका दायर कर 31 मई 2007 के फैसले और आदेश को चुनौती दी थी। हालांकि, इस न्यायालय की समन्वय पीठ ने 12 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा विलंब के आधार पर इसे खारिज कर दिया था। इसके अतिरिक्त, अमित जोगी की बरी होने को चुनौती देने के लिए पुनरीक्षण याचिका को आपराधिक अपील में परिवर्तित करने की मांग करते हुए शिकायतकर्ता सतीश जग्गी द्वारा दायर याचिका को भी 19 सितंबर 2011 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया गया था।

हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 18 अगस्त 2011, 12 सितंबर .2011 और 19 सितंबर 2011 के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ,सतीश जग्गी व सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 06 नवंबर 2025 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में याचिका दायर करने में हुई देरी को क्षमा कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई से कहा, सतीश जग्गी और राज्य सरकार को बनाए पक्षकार।

याचिका को सीबीआई द्वारा दायर अपील की अनुमति के आवेदन पर गुण-दोष के आधार पर पुनर्विचार के लिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट को वापस भेज दिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है, सीबीआई उक्त कार्यवाही में वास्तविक शिकायतकर्ता और राज्य को आवश्यक पक्षकार बनाए। सीबीआई के वकील वैभव ए गोवर्धन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 06 नवंबर 2025 को पारित आदेश की एक प्रति हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की है, जिसे रिकॉर्ड में ले लिया गया है। बीते सुनवाई में डिवीजन बेंच ने जग्गी हत्याकांड के आरोपी अमित जोगी और याचिकाकर्ता सतीश जग्गी को नोटिस जारी कर अपने अधिवक्ता के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

23 साल पहले रामअवतार की हुई थी हत्या

बता दें कि 23 साल पहले रामअवतार जग्गी की गोली मारकर कर दी थी हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने 31 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में बलटू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को दोषी करार दिया गया था। हालांकि बाद में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। अमित जोगी को बरी किए जाने के खिलाफ रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

उत्तर: यह घटना 4 जून 2003 को हुई थी, जब एनसीपी नेता रामअवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

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लेखक के बारे में

Dageshwar Dewangan
Dageshwar Dewangan

IBC24 डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हूं, जहां मेरी जिम्मेदारी मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति सहित प्रमुख विषयों की खबरों की कवरेज और प्रस्तुति है। वर्ष 2016 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं और अब तक 10 वर्षों का अनुभव प्राप्त किया है। विभिन्न प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए न्यूज़ राइटिंग और डिजिटल टूल्स में दक्षता हासिल की है। मेरे लिए पत्रकारिता सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है—सटीक, तेज और असरदार जानकारी पाठकों तक पहुंचाना मेरा लक्ष्य है। बदलते डिजिटल दौर में खुद को लगातार अपडेट कर, कंटेंट की गुणवत्ता बेहतर करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।

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Web Title: Amit Jogi directed to surrender within three weeks

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