Jashcraft News: जशक्राफ्ट को मिला राष्ट्रीय पहचान का नया मंच, देश के तमाम एयरपोर्ट पर मिलेंगे महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी और लकड़ी से बनाए उत्पाद, रेयर प्लेनेट से हुआ MOU

Jashpur Jashcraft News: वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है।

Jashcraft News: जशक्राफ्ट को मिला राष्ट्रीय पहचान का नया मंच, देश के तमाम एयरपोर्ट पर मिलेंगे महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी और लकड़ी से बनाए उत्पाद, रेयर प्लेनेट से हुआ MOU

Jashpur Jashcraft News, image source: cgdpr

Modified Date: January 25, 2026 / 11:29 pm IST
Published Date: January 25, 2026 11:17 pm IST
HIGHLIGHTS
  • पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना
  • जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड
  • ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा

Jashpur News: वन विभाग की पहल पर जशपुर जिले में महिला सशक्तिकरण और वन आधारित आजीविका को नई दिशा देने वाला एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में विगत दिवस बगिया में रेयर प्लेनेट संस्था तथा जशपुर जिले की स्व-सहायता समूह—जागरण, स्माईल आरती, राखी एवं मुस्कान समूह—के मध्य जशक्राफ्ट ब्रांड के उत्पादों के विपणन हेतु अनुबंध समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।इस महत्वपूर्ण समझौते के अंतर्गत अब जशपुर की जनजातीय महिलाओं द्वारा बांस, छिंद, मिट्टी एवं लकड़ी से निर्मित हस्तशिल्प, आभूषण एवं सजावटी उत्पाद देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर संचालित रेयर प्लेनेट के बिक्री केंद्रों के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध होंगे। इससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों को स्थायी बाजार, उचित मूल्य तथा नियमित आय के अवसर प्राप्त होंगे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एमओयू को जशपुर की महिलाओं के लिए एक निर्णायक उपलब्धि बताते हुए कहा कि जशक्राफ्ट जैसे ब्रांड के माध्यम से हमारी आदिवासी बहनों की कला अब देशभर के लोगों तक पहुँचेगी। यह पहल केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मसम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता और स्वावलंबन की मजबूत नींव रखती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि वन एवं परंपरागत ज्ञान आधारित आजीविका को बाजार से जोड़ा जाए, ताकि महिलाएं अपने गांव में रहकर सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह एमओयू ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार करता है तथा जशपुर की जनजातीय महिलाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक ठोस और दूरगामी पहल है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या साय, पत्थलगांव क्षेत्र की विधायक श्रीमती गोमती साय, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित स्व-सहायता समूह की महिलाएं एवं रेयर प्लेनेट संस्था के प्रतिनिधिगण उपस्थित थे।

पुस्तक विमोचन और जशक्राफ्ट उत्पादों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा “जशक्राफ्ट” पर आधारित विशेष पुस्तक का विमोचन किया गया। उन्होंने जशक्राफ्ट के अंतर्गत तैयार किए गए आभूषणों एवं हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए उनकी गुणवत्ता, कलात्मकता और नवाचार की सराहना की।

स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी एवं विधायक श्रीमती गोमती साय का जशक्राफ्ट ब्रांड के पारंपरिक आभूषण पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया, जो महिला सशक्तिकरण और स्थानीय संस्कृति के सम्मान का सशक्त प्रतीक बना।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री द्वारा जशक्राफ्ट ब्रांड के प्रचार-प्रसार हेतु तैयार वीडियो का भी विमोचन किया गया, जिससे जशक्राफ्ट को राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।

जशक्राफ्ट: जशपुर की सांस्कृतिक विरासत से जन्मा सशक्त ब्रांड

उल्लेखनीय है कि जशक्राफ्ट जशपुर जिले की समृद्ध जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की सजीव अभिव्यक्ति है। जिले की लगभग 65 प्रतिशत जनसंख्या जनजातीय समुदायों से आती है, जहाँ पीढ़ियों से बाँस, कांसा घास, छिंद पत्ते, लकड़ी एवं मिट्टी से हस्तनिर्मित कलाकृतियाँ तैयार की जाती रही हैं। पूर्व में संगठित व्यवस्था और बाजार की कमी के कारण कारीगरों की प्रतिभा सीमित रह जाती थी।

जिला प्रशासन की पहल से जशक्राफ्ट के रूप में ऐसा सशक्त मंच विकसित हुआ है, जो जशपुर जिले के आठों विकासखंडों के कारीगरों को एकजुट कर उनकी कला को पहचान, संरक्षण और बाजार उपलब्ध करा रहा है।

इस पहल के केंद्र में आदिवासी महिला कारीगर हैं, जिनके हाथों से बिना मशीनों के बने उत्पाद परंपरा, प्रकृति और आत्मनिर्भरता का संदेश देते हैं। जशक्राफ्ट आज स्वदेशी ज्ञान से आकार लेते हुए एक टिकाऊ और सम्मानजनक आजीविका मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वन विभाग द्वारा संचालित यह पहल महिला स्वावलंबन, वन आधारित आजीविका और स्थानीय उत्पादों के राष्ट्रीय बाजारीकरण की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में जशपुर को हस्तशिल्प के राष्ट्रीय मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाएगी।

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लेखक के बारे में

डॉ.अनिल शुक्ला, 2019 से CG-MP के प्रतिष्ठित न्यूज चैनल IBC24 के डिजिटल ​डिपार्टमेंट में Senior Associate Producer हैं। 2024 में महात्मा गांधी ग्रामोदय विश्वविद्यालय से Journalism and Mass Communication विषय में Ph.D अवॉर्ड हो चुके हैं। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से M.Phil और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर से M.sc (EM) में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। जहां प्रावीण्य सूची में प्रथम आने के लिए तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के हाथों गोल्ड मेडल प्राप्त किया। इन्होंने गुरूघासीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर से हिंदी साहित्य में एम.ए किया। इनके अलावा PGDJMC और PGDRD एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी किया। डॉ.अनिल शुक्ला ने मीडिया एवं जनसंचार से संबंधित दर्जन भर से अधिक कार्यशाला, सेमीनार, मीडिया संगो​ष्ठी में सहभागिता की। इनके तमाम प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में लेख और शोध पत्र प्रकाशित हैं। डॉ.अनिल शुक्ला को रिपोर्टर, एंकर और कंटेट राइटर के बतौर मीडिया के क्षेत्र में काम करने का 15 वर्ष से अधिक का अनुभव है। इस पर मेल आईडी पर संपर्क करें anilshuklamedia@gmail.com