Reported By: Tehseen Zaidi
,Mahadev Betting App Case | Photo Credit: AI
रायपुर: Mahadev Betting App Case महादेव ऑनलाइन बेटिंग एप और स्काई एक्सचेंज से जुड़े देश के बहुचर्चित मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कारोबारी विकास गर्ग को दिल्ली स्थित उसके आवास से गिरफ्तार कर लिया है। ईडी दिल्ली की कोर्ट में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लेकर देर रात पहुंची। जिसके बाद आज उन्हें कोर्ट में पेश किया।
Mahadev Betting App Case जानकारी के अनुसार, विकास गर्ग को रायपुर स्थित ED की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। जांच एजेंसी ने कोर्ट से आरोपी को 14 दिन की रिमांड पर सौंपने की मांग की है, ताकि मामले में आगे की पूछताछ और जांच की जा सके।
बता दें कि गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही ईडी ने विकास गर्ग, उसके परिवार और उसके स्वामित्व व नियंत्रण वाली कंपनियों की 940.77 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल संपत्तियों को प्रोविजनल अटैचमेंट (अस्थायी कुर्की) के तहत जब्त किया था। कुर्क की गई संपत्तियों में दिल्ली स्थित आवास, गोवा और नैनीताल की अचल संपत्तियां, विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि तथा एबिक्स कंपनी में 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी शामिल है।
ईडी का दावा है कि इन संपत्तियों का निर्माण और अधिग्रहण महादेव बेटिंग एप से अर्जित कथित अवैध धन से किया गया। 64 प्रतिशत हिस्सेदारी ईडी की जांच में सामने आया है कि विकास गर्ग विकास इकोटेक लिमिटेड, विकास लाइफकेयर लिमिटेड और एराया लाइफस्पेसेज लिमिटेड का प्रमोटर है। एजेंसी का आरोप है कि एराया लाइफस्पेसेज लिमिटेड के माध्यम से उसने एबिक्सकैश में करीब 64 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की और इसके लिए महादेव बेटिंग नेटवर्क से प्राप्त अवैध धन का इस्तेमाल किया।
जांच में यह भी सामने आया कि बेटिंग से प्राप्त रकम को पहले शेल कंपनियों और फर्जी एंट्री आपरेटरों के जरिए कई स्तरों पर घुमाया गया, ताकि उसकी वास्तविक पहचान छिपाई जा सके। बाद में इसी रकम को शेयर बाजार, Real Estate, कार्पोरेट अधिग्रहण और अन्य निवेशों में लगाया गया।
ईडी के अनुसार महादेव आनलाइन बेटिंग सिंडिकेट हर महीने 450 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई करता था। यह नेटवर्क फ्रेंचाइजी आधारित पैनल सिस्टम पर संचालित होता था, जिसमें देशभर में फैले एजेंट आनलाइन सट्टा खिलाकर करोड़ों रुपये की वसूली करते थे। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि इस अवैध कमाई का एक हिस्सा प्रभावशाली लोगों और भ्रष्ट लोकसेवकों तक पहुंचाया जाता था।