Mahasamund Manuscripts : छत्तीसगढ़ के इस जिले में मिला 300 साल पुराना खजाना! जंगलों में छिपी दुर्लभ पांडुलिपियां, अब ऐप से होंगी डिजिटल

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में 300 साल से अधिक पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है, जिन्हें अब ‘ज्ञान भारतम ऐप’ के जरिए डिजिटाइज कर संरक्षित किया जा रहा है।

Mahasamund Manuscripts : छत्तीसगढ़ के इस जिले में मिला 300 साल पुराना खजाना! जंगलों में छिपी दुर्लभ पांडुलिपियां, अब ऐप से होंगी डिजिटल

Mahasamund Manuscripts / Image SOurce : IBC24

Modified Date: May 3, 2026 / 01:32 pm IST
Published Date: May 3, 2026 1:29 pm IST
HIGHLIGHTS
  • महासमुंद में 300 वर्ष से अधिक पुरानी दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज।
  • ‘ज्ञान भारतम ऐप’ के जरिए पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण शुरू।
  • ताड़पत्र पर लिखी पांडुलिपियों में धर्म, ज्योतिष, औषधि और इतिहास का ज्ञान।

महासमुंद : Mahasamund Manuscripts  300 वर्ष से अधिक पुरानी दुर्लभ एवं बहुमूल्य पांडुलिपियाँ प्राचीनतम ज्ञान की ऐतिहासिक धरोहर हैं , जिन्हे अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा लांच की गई ” ज्ञान भारतम ऐप ” के माध्यम से संरक्षित एवं डिजिटलीकरण किया जा रहा है । महासमुंद जिला ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध माना जाता है।

ज़िले 300 वर्ष से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज

महासमुंद जिले मे जहाँ हजारों वर्ष पुरानी वैभव शाली सभ्यता के प्रमाण पुरातात्विक स्थल सिरपुर मे मिलते हैं, वहीं अब दुर्लभ पांडुलिपियों के सर्वेक्षण मे महासमुंद जिले को छत्तीसगढ़ मे सर्वाधिक पांडुलिपि वाला जिला घोषित किया गया है। Gyan Bharatam App वर्तमान मे जिले मे 300 वर्ष से भी अधिक पुरानी पांडुलिपियों की खोज की जा चुकी है ।विशेष रूप से दूरस्थ जंगलों के बीच बसे अंचल मे जनजातीय समुदायों के पास दुर्लभ पांडुलिपियाँ सहेज कर रखी गई हैं।

Rare Palm Leaf Manuscripts ताड़पत्र पर लिखी गई हैं पांडुलिपियाँ

यह पांडुलिपियाँ अधिकतर ताड़पत्र पर लिखी गई हैं। जिनमे उड़िया लिपि का प्रयोग हुआ है। सैंकड़ों वर्ष पुराने इन पांडुलिपियों मे भागवत पुराण, लक्ष्मी पुराण , दुर्गा ग्रंथ , ज्योतिष ज्ञान , जनजातीय धार्मिक संस्कार पद्धति, जादू-टोना, भूत पिशाच निवारण, जड़ी-बूटी औषधि, पशु चिकित्सा , बाण विद्या एवं इतिहास से संबंधित विषय शामिल हैं।

Bagbahara Heritage इन जगहों पर मिली पांडुलिपियों

गौरतलब है कि बागबाहरा ब्लाक के दूरस्थ एवं घोर जंगल के बीच बसे गांवों मे दुर्लभ पांडुलिपियों की खोज हुई है। जनजातीय आदिवासी परिवारों के पास सैंकड़ों सालों से सुरक्षित पांडुलिपियों का आज भी धार्मिक , सामाजिक , चिकित्सा एवं तंत्र मंत्र मे उपयोग हो रहा है।

क्या होती है पांडुलिपि?

पांडुलिपि वह हस्तलिखित सामग्री होती है , जो सामान्यतः 75 वर्ष से अधिक पुरानी हो । यह पांडुलिपियाँ ताड़पत्र, भोजपत्र, ताम्रपत्र, चमड़े, कपड़े या अन्य पारंपरिक माध्यमों पर लिखी गई हो सकती हैं । इसमे प्राचीन कहानी, इतिहास, धार्मिक ग्रंथ, अनुष्ठान विधि, लोकज्ञान एवं औषधीय ज्ञान आदि विषय समाहित होते हैं ।

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लेखक के बारे में

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