CG News: छत्तीसगढ़ के 10 IAS-IPS अफसरों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई, रह चुके हैं इन जिलों के कलेक्टर और एसपी, ED ने राज्य सरकार को लिखा पत्र

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छत्तीसगढ़ के 10 IAS-IPS अफसरों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई, Major action may be taken against 10 IAS-IPS officers of Chhattisgarh

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  • Publish Date - September 29, 2025 / 06:17 PM IST,
    Updated On - September 29, 2025 / 06:26 PM IST
HIGHLIGHTS
  • ईडी ने 10 IAS-IPS अफसरों के खिलाफ राज्य सरकार से की कार्रवाई की सिफारिश
  • सभी अफसर कोल बेल्ट जिलों में कलेक्टर या एसपी रह चुके
  • रिपोर्ट में कोल लेवी घोटाले में अफसरों की संलिप्तता का आरोप

रायपुर। CG News: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी बीच अब खबर है कि जांच एजेंसी ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर 10 आईएएस-आईपीसी अफ़सरों पर कार्रवाई की अनुशंसा की। सूत्रों की मानें तो ये सभी अधिकारी सभी कोयला घोटाले में शामिल हैं और बिलासपुर, कोरबा और रायगढ़ जैसे कोल बेल्ट जिलों में पिछली सरकार के दौरान कलेक्टर और एसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात थे।

क्या है कोल लेवी घोटाला

CG News: बता दें कि ED ने छत्तीसगढ़ में जांच के बाद 540 करोड़ के कोल लेवी स्कैम का खुलासा किया था। इसमें IAS रानू साहू के अलावा IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, जेडी माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा कांग्रेस नेता और कुछ कारोबारी भी ED के जांच के दायरे में रहे। इन लोगों से पूछताछ की गई है और इनके घरों से कुछ दस्तावेजों को भी जब्त किया गया । ईडी ने पिछले साल 540 करोड़ के अवैध कोल परिवहन का केस दर्ज किया है। कोल परिवहन में कोयला एजेंसियों से प्रति टन 25 रुपए कमीशन वसूलने का आरोप है। ये वसूली सिंडीकेट करता था, सिंडिकेट के लोगों के नाम पर ही FIR हुई है। छत्तीसगढ़ में कोयला घोटाले मामले में ED की रिपोर्ट पर ACB /EOW ने दो पूर्व मंत्रियों, विधायकों सहित 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है।

चुनाव में खर्च की गई कमीशन की राशि

जुलाई 2020 और जून 2022 के बीच परिवहन किए गए कोयले में प्रति टन 25 रुपए चार्ज किए गए। ED ने अपने प्रेस नोट जारी कर बताया है कि कोल लेवी से आने वाले रुपए का इस्तेमाल सरकारी अधिकारियों और नेताओं को रिश्वत देने के लिए किया गया था। साथ ही इसका कुछ हिस्सा चुनावों में भी खर्च किया गया था। बाकी राशि से चल और अचल संपत्तियां खरीदी गई।


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