सहयोग, धैर्य और पेशेवर ईमानदारी पर आधारित करियर बनाएं : प्रधान न्यायाधीश
सहयोग, धैर्य और पेशेवर ईमानदारी पर आधारित करियर बनाएं : प्रधान न्यायाधीश
रायपुर, 22 फरवरी (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कानून के छात्रों से सहयोग, धैर्य और पेशेवर ईमानदारी पर आधारित करियर बनाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि उनके सहपाठी भविष्य में उनके सहकर्मी, अदालत में प्रतिद्वंद्वी और संभावित रूप से न्यायपालिका के सदस्य बन सकते हैं।
यहां हिदायतुल्ला राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के नौवें दीक्षांत समारोह में उन्होंने कहा कि स्नातक छात्र अनिश्चितता और जिम्मेदारी से भरी एक पेशेवर यात्रा में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें एक सार्थक करियर सहयोगात्मक रूप से काम करने की क्षमता और पेशेवर विकास की दीर्घकालिक प्रकृति को अपनाने की इच्छा पर निर्भर करता है।
स्नातकों, संकाय सदस्यों और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में अपने संबोधन में प्रधान न्यायाधीश ने पेशेवर संबंधों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, ‘‘जहां कानूनी शिक्षा अक्सर परीक्षाओं, रैंकिंग और प्लेसमेंट के माध्यम से प्रतिस्पर्धा पर जोर देती है, वहीं कानूनी पेशे की मूल भावना सहयोग के माध्यम से ही जीवित रहती है।’’
उन्होंने कानूनी व्यवस्था और कई सहायक नदियों से बनी नदी के बीच समानता बताते हुए समझाया कि न्याय प्रशासन कनिष्ठों, वरिष्ठों, सहकर्मियों और यहां तक कि विरोधी वकीलों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
प्रधान न्यायाधीश ने स्नातकों को अपने साथियों के साथ सम्मान, सहानुभूति और निष्पक्षता से पेश आने की सलाह दी, यह देखते हुए कि सहपाठी भविष्य में सहकर्मी, अदालत में प्रतिद्वंद्वी और संभावित रूप से न्यायपालिका के सदस्य बनेंगे।
उन्होंने वकालत के अपने शुरुआती वर्षों का एक अनुभव साझा किया, जिसमें बिना किसी स्वार्थ के एक साथी वकील की सहायता करने से स्थायी पेशेवर विश्वास और सहयोग का विकास हुआ।
उन्होंने कहा, “सद्भावना के ऐसे कार्य न केवल व्यक्तिगत करियर को मजबूत करते हैं, बल्कि कानूनी पेशे की विश्वसनीयता को भी बढ़ाते हैं।” उन्होंने कानूनी क्षेत्र को एक “लंबी प्रक्रिया” के रूप में वर्णित करते हुए कहा कि इसमें अधिकार और मान्यता दशकों में धीरे-धीरे विकसित होती है।
भाषा प्रशांत सुरेश
सुरेश

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