रायपुर, 26 जनवरी (भाषा) छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने सोमवार को कहा कि पिछले दो वर्षों में 2500 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसपर्मण किया और इस वर्ष मार्च महीने तक बस्तर की धरती से माओवाद को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा।
राज्यपाल ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के पुलिस परेड मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली।
इस अवसर पर डेका ने अपने संदेश में कहा, ”बरसों तक छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा की यातना झेली है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमने सुनियोजित रणनीति के माध्यम से माओवाद के विरुद्ध लड़ाई छेड़ी। मैं प्रदेश के बहादुर जवानों के साहस की भरपूर प्रशंसा करता हूं। आप लोगों ने रात-दिन जागकर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपना मनोबल ऊंचा रखा है। हमारे जवानों ने जहर फैलाने वाले माओवाद के थिंक टैंक का सफाया कर दिया है।”
उन्होंने कहा, ”हमने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र में आस्था प्रकट करने की अपील की। बहुत से माओवादियों ने हिंसा को छोड़कर संविधान को अपनाया।
हमने नक्सलियों के पुनर्वास की नयी नीति तैयार की। दो साल में ही 2500 से अधिक नक्सलियों ने संविधान में आस्था प्रकट की। बस्तर की धरती से हम इस साल के मार्च महीने तक माओवाद को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे।”
डेका ने कहा, ”बस्तर ने माओवाद का बड़ा नुकसान सहा है। अब बस्तर के जख्मों को तेजी से भरने का काम हमें करना है। इसके लिए हमने ठोस रोडमैप तैयार किया है। नयी औद्योगिक नीति में जनजातीय क्षेत्रों में निवेश पर सर्वाधिक अनुदान के प्रावधान हैं। जनजातीय लोगों के लिए उद्यम आरंभ करने पर सस्ती जमीन और विशेष रियायतें हैं।’’
उन्होंने कहा कि नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गांव) जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन इलाकों में सतत विकास पर जोर है ताकि स्थानीय वनोपज आदि संसाधनों के बेहतर दोहन से जनजातियों की आय बढ़े।
उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना आदि प्रमुख योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया है।’’
डेका ने कहा कि बस्तर में बंद अनेक स्कूल पुनः आरंभ किये गये हैं। उन्होंने कहा, ”माओवादी हिंसा के चलते प्रदेश के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठप पड़ी थीं। अब इनका कायाकल्प हो रहा है। सुकमा के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ…।’’
उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने से जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी सुविधा हो रही है। दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कॉलेज शुरू होने से स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा।
डेका ने कहा, ”हम एक ऐसे लोक कल्याणकारी राज्य में रह रहे हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक न्याय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्हें लागू करने में मॉडल राज्य है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए संविधान पवित्र दस्तावेज है। 1975 में आपातकाल लगाकर इसे तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश हुई लेकिन हमारे लोकतंत्र सेनानियों के अदम्य साहस से यह कोशिश सफल नहीं हुई। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जो अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ ही अपने लोकतंत्र सेनानियों का भी पूरा सम्मान करता है और उन्हें सम्मान निधि प्रदान करता है।”
डेका ने कहा कि ‘वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई और रजत जयंती वर्ष में छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया गया है, जिसके लिए रोडमैप भी तैयार किया गया है।
राज्यपाल ने कहा, ”हमारी नयी औद्योगिक नीति ने प्रदेश में निवेश के लिए नयी संभावनाएं पैदा की हैं। राज्य को सात लाख 83 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इनसे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।”
उन्होंने कहा, ”छत्तीसगढ़ आधुनिक उद्योगों की स्थापना में भी आगे है। यहां सेमीकंडक्टर संयंत्र का काम प्रगति पर है। एआई डेटा सेंटर पार्क अस्तित्व में आ रहा है। आईटी क्षेत्र भी तेजी से तरक्की कर रहा है।”
डेका ने कहा, ”हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। हम जैविक खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहे हैं। पूरी दुनिया में जैविक उत्पादों की मांग बढ़ी है। छत्तीसगढ़ की जमीन जैविक खेती के लिए काफी अनुकूल है।’’
उन्होंने गणतंत्र दिवस पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दी और कहा कि यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखंडता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
भाषा संजीव मनीषा अविनाश
अविनाश