Opium cultivation in CG: छत्तीसगढ़ में फिर पकड़ी गई अफीम की अवैध खेती, इस इलाके में लहलहा रही थी फसल, मौके पर पहुंची पुलिस

छत्तीसगढ़ में फिर पकड़ी गई अफीम की अवैध खेती, इस इलाके में लहलहा रही थी फसल, Opium Cultivation in Chhatisgarh

Opium cultivation in CG: छत्तीसगढ़ में फिर पकड़ी गई अफीम की अवैध खेती, इस इलाके में लहलहा रही थी फसल, मौके पर पहुंची पुलिस
Modified Date: March 11, 2026 / 09:01 pm IST
Published Date: March 11, 2026 8:57 pm IST

बलरामपुर। Opium Cultivation in Chhattisgarh जिले में अवैध अफीम की खेती का एक और मामला सामने आया है। करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव में अफीम की खेती होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई और मामले की जांच शुरू कर दी है।

Opium Cultivation in Chhatisgarh प्रारंभिक जानकारी के अनुसार चंदाडांडी गांव में खेत में अफीम के पौधे लगाए गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस की टीम गांव पहुंची और मौके का निरीक्षण कर खेती की पुष्टि की। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह अवैध खेती किसके द्वारा की जा रही थी और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। बताया जा रहा है कि चंदाडांडी गांव झारखंड की सीमा से लगा हुआ है, जिसके कारण सीमा पार से जुड़े नेटवर्क की आशंका भी जताई जा रही है। पुलिस आसपास के इलाकों में भी जांच कर रही है और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गहन जांच की जा रही है और अवैध खेती करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इन जगहों में हुआ खुलासा

बता दें कि एक दिन पहले ही बलरामपुर जिले के ही कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में अफीम की खेती मामले का खुलासा हुआ था। यहां झारखंड का एक व्यक्ति जमीन को लीज पर लेकर अफीम की खेती कर रहा था। पुलिस और प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर फसल को नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि गांव के सरपंच ने जनवरी महीने में ही पुलिस को इसकी सूचना दी थी, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं हो पाई थी। अब मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है।

इन्हे भी पढ़ें:-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।