छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए 62 हजार से अधिक कर्मचारी तैनात
छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए 62 हजार से अधिक कर्मचारी तैनात
रायपुर, 13 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ में जनगणना के लिए 62 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि जनगणना दो चरणों में किया जाएगा।
राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) मनोज कुमार पिंगुआ ने सोमवार को प्रेसवार्ता में बताया कि पहला चरण एक मई से 30 मई, 2026 तक चलेगा जिसमें मकानों की सूची बनायी जायेगी और उनकी गणना की जायेगी।
उन्होंने कहा कि दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा।
पिंगुआ ने बताया कि जनगणना देश में पहली बार डिजिटल तरीके से की जाएगी, जिसमें स्व-गणना भी एक विकल्प होगा।
अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में स्व-गणना के लिए राज्य में मकान सूचीकरण कार्य शुरू होने से 15 दिन पूर्व की अवधि निर्धारित की गई है, जो 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक होगी। उन्होंने कहा कि स्व-गणना विकल्प के तहत व्यक्ति अपनी जानकारी ऑनलाईन स्वयं भर सकता है।
उन्होंने बताया कि एक खास ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन आईडी’ बनाई जाएगी तथा इसे एक मई से 30 मई तक घर-घर पहुंचने पर प्रगणक के साथ साझा किया जाना है।
उन्होंने कहा कि प्रगणक द्वारा पुष्टि के बाद ही मकान सूचीकरण और मकानों की गणना का कार्य पूर्ण होगा।
अधिकारी ने बताया कि स्व-गणना ऐच्छिक है, अनिवार्य नहीं क्योंकि प्रगणक एक मई से 30 मई के दौरान घर आकर जानकारी अवश्य दर्ज करेंगे।
पिंगुआ ने बताया कि प्रगणक घर-घर जाकर आवास की स्थिति, सुविधाओं और परिसंपत्ति से जुड़े 33 तय सवालों के जवाब एक मोबाइल ऐप के माध्यम से संकलित करेंगे।
उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए लगभग 62,500 कर्मचारियों को लगाया गया है जिनमें 47 प्रमुख जनगणना अधिकारी, 250 ज़िला-स्तरीय अधिकारी, 472 चार्ज अधिकारी, 1,160 ‘मास्टर ट्रेनर्स’ और ‘फील्ड ट्रेनर’, 51,300 प्रगणक और नौ हजार पर्यवेक्षक शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि भारत की जनगणना दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय कामों में से एक है।
भारत में पहली जनगणना 1872 में हुई थी, जबकि पूरे देश में एक साथ पहली जनगणना 1881 में हुई थी।
अधिकारी ने कहा कि जनगणना 2027 इस श्रृंखला की 16वीं जनगणना होगी और आज़ादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी।
उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य, जनगणना अधिनियम, 1948 और जनगणना नियमावली, 1990 के प्रावधानों के तहत की जाती है तथा इस दौरान इकट्ठा की गई सभी निजी जानकारी को पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है और किसी भी व्यक्ति या एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस आंकड़े का इस्तेमाल कर, पुलिस या जांच के मकसद से नहीं किया जा सकता, और न ही इसे किसी भी कानूनी कार्रवाई में सबूत के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल पूरी तरह से राज्य और देश के लिए विकास योजनाएं बनाने के लिए किया जाता है।
छत्तीसगढ़ के जनगणना संचालन निदेशक और नागरिक पंजीकरण निदेशक, कार्तिकेय गोयल ने बताया कि इस प्रक्रिया में राज्य भर के 33 जिले, 195 नगरीय निकाय, 252 तहसील और 19,978 गांव शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि इस कार्य को करने के लिए 251 ग्रामीण और 221 नगरीय ‘चार्ज यूनिट’ बनाई गई हैं, जिनमें लगभग 49 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यहां गणना करने वाले घर-घर जाकर सर्वे करेंगे।
उन्होंने बताया कि नागरिकों को जनगणना से जुड़े सवालों में मदद करने के लिए एक टोल-फ्री नंबर (1855) भी शुरू किया गया है, जो राज्य में 16 अप्रैल, 2026 से कार्यशील जाएगा।
भाषा संजीव राजकुमार
राजकुमार

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