Raipur Police Commissioner System | Photo Credit: AI
रायपुर: Raipur Police Commissioner System छत्तीसगढ़ में पहली बार भोपाल मॉडल के आधार पर कमिश्नरी सिस्टम लागू किया जा रहा है। सत्तापक्ष का दावा है कि इससे कानून व्यवस्था चौकस होगी, लेकिन विपक्ष इसे फेल सिस्टम बताते हुए बेकार की कवायद मानता है। जानकारों ने भी इसमें कई खामियां गिनाई हैं। दावा ये भी है इसे लागू करते हुए IPS लॉबी, IAS लॉबी और यहां तक भी सरकार के भीतर भी शंकाएं और सवाल हैं।
Police Commissioner System 23 जनवरी 2026 से रायपुर में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने जा रहा है। जिसके तहत शहरी क्षेत्र के 21 थाने कमिश्नर जबकि 12 थाने SP संभालेंगे। बुधवार शाम को गृह विभाग इस बावत नोटिफिकेशन जारी कर चुका है इसके तहत रायपुर पुलिस को 2 हिस्सों में बांटे गए हैं। शहरी और ग्रामीण रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने के लिए शहर की पुलिस फोर्स को 2 हिस्सों में बांटा जाएगा। MP मॉडल पर आधारित,कमिश्नरी सिस्टम में रायपुर पुलिस कमिश्नरी में कुल 37 पद होंगे। जिसमें 1 पुलिस आयुक्त, 1 अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, 5 आयुक्त , 9 अतिरिक्त उपायुक्त और 21 सहायक आयुक्त होंगे। पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रेट के अधिकार प्राप्त होंगे जो कि पहले जिला कलेक्टर और कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास हुआ करते थे। कमिश्नरी सिस्टम में प्रमुख तौर पर- जोन प्रबंधन, अपराध शाखा, ट्रैफिक, पुलिस मुख्यालय, साइबर सेल, इंटेलिजेंस, महिला अपराध, प्रोटोकॉल, लॉ-एंड-ऑर्डर की जिम्मदारी होंगी।
हालांकि, इसे लागू करने के पहले से ही ना सिर्फ विपक्ष ने इस पर सवाल उठाए हैं बल्कि कुछ जानकार ने कुछ बिंदुओं पर समस्या गनाई हैं। मध्यप्रदेश की जगह ओडिशा मॉडल अपनाया जाना था, पुलिस कमिश्नर को प्राप्त 22 अधिकारों में से सिर्फ 9 अधिकार दिए गए हैं, आबकारी, जिलाबदर अधिनियम संबंधी अधिकार ना देने से सुधार अधूरे और अप्रभावी होंगे, शहरी और ग्रामीण के अंतर्गत कुछ थानों और क्षेत्रों का बंटवारा अव्यवहारिक है।इस मुद्दे पर सत्तापक्ष के भीतर भी पूर्ण सहमति ना होना का दावा है।
इस सिस्टम को लेकर सरकार का तर्क है कि ये पूरे अध्ययन और प्लानिंग के साथ कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लागू किया जा रहा है। जबकि विपक्ष ने इसे इस सिस्टम की जरूरत से लेकर प्लानिंग तक पर सवाल उठाए हैं। सवाल ये है कि क्या पुलिस की प्रशासनिक शक्ति बढ़ने से संतुलन बिगड़ेगा, क्या नए सिस्टम से IAS और IPS के बीच तनातनी बढ़ेगी। सबसे बड़ा सवाल जिस राज्य से ये मॉडल उठाया गया है क्या वहां ये कामयाब है?