शह मात The Big Debate: सैकड़ों आदिवासी जेल में.. रिहाई कमेटी की रिपोर्ट कब? फिर गूंजा आत्मसमर्पित नक्सलियों का मुद्दा, नक्सल सफाए के बाद भी राहत के लिए लंबा इंतजार क्यों?

CG Naxal Politics News: नक्सलवाद समाप्ति की घोषणा के बाद सरकारों ने सैंकड़ों आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बस्तर विकास पर फोकस किया है।

शह मात The Big Debate: सैकड़ों आदिवासी जेल में.. रिहाई कमेटी की रिपोर्ट कब? फिर गूंजा आत्मसमर्पित नक्सलियों का मुद्दा, नक्सल सफाए के बाद भी राहत के लिए लंबा इंतजार क्यों?

CG Naxal Politics News/Image Credit: IBC24.in

Modified Date: July 1, 2026 / 11:56 pm IST
Published Date: July 1, 2026 11:56 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 31 मार्च 2026 को देश-प्रदेश से नक्सलवाद समाप्ति की घोषणा की थी।
  • सरकारों ने सैंकड़ों आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बस्तर विकास पर फोकस किया है।
  • सैंकड़ों सरेंडर नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं के जरिए मुख्य धारा में जोड़ा जा रहा है।

CG Naxal Politics News: रायपुर: 31 मार्च 2026 को देश-प्रदेश से नक्सलवाद समाप्ति की घोषणा के बाद सरकारों ने सैंकड़ों आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास और बस्तर विकास पर फोकस किया है। दावा है, सैंकड़ों सरेंडर नक्सलियों को पुनर्वास योजनाओं के जरिए मुख्य धारा में जोड़ा जा रहा है, लेकिन इसी बीच वो आदिवासियों जो नक्सल या नक्सल सहयोगी होने के आरोपों में सालों से जेल में बंद हैं, वो और उनके परिवार सवाल उठा रहे हैं कि उनकी रिहाई का क्या, लाखों के ईनामी दुर्दांत नक्सली लीडर्स के पुनर्वास के लिए केंद्र-राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं, लेकिन वो अपनी गरीबी और अज्ञानता के चलते नक्सल सहयोगी के आरोप में सालों से बिना किसी पैरवी सालों से रिहाई के इंतजार में हैं।

मुद्दे पर विपक्ष ने जेल में बंद गरीब आदिवासियों मामलों पर ध्यान ना देने का आरोप लगाते हुए, जल्द प्रक्रिया पूरी करने की मांग की, कांग्रेस विधायक विक्रम मंडावी ने इस बारे में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है। (CG Naxal Politics News) जवाब में सरकार का दावा है कि समीक्षा जारी है।

दूसरी तरफ, नक्सल प्रभावित इलाकों में सालों से पदस्थ सैंकड़ों पुलिसकर्मियों को नियम के मुताबिक मैदानी नियुक्ति का इंतजार है। करीब 200-250 SI और इंस्पेक्टर बीते 10 साल से ज्यादा वक्त से बस्तर के विभिन्न अंदरूनी इलाकों में ही पदस्थ हैं, कई तो इंतजाक में रिटायर्ड भी हो गये, वहीं वन टाइम प्रमोशन वाले करीब 65 SI ने बिलासपुर हाईकोर्ट तक में गुहार लगाई। कोर्ट ने कडी नाराजगी जताई, पुलिस मुखिया DGP ने हलफनामा देकर 3 साल में शिफ्टिंग का दावा भी किया लेकिन हालात अब भी जस के तस हैं। हद ये है कि मौखिक, लिखित, न्यायिक प्रक्रिया के बाद भी पुलिस कर्मियों का इंतजार खत्म नहीं हुआ और तो और वरिष्ठ अफसर, उनके दरवाजे पर आए पीड़ित पुलिसकर्मियों के परिजनों से मिलने तक से बचते हैं।

CG Naxal Politics News: सीधा सवाल ये है कि जब नक्सलवाद की समाप्ति का ऐलान हो चुका है। दुर्दांत नक्सली पुनर्वास नीति का लाभ लेते हुए मुक्त जीवन जी रहे हैं तो फिर नक्सल मददगारों के आरोपियों को रिहाई और न्याय के लिए इतना इंतजार क्यों? सवाल नक्सल इलाके में दशकों से तैनात पुलिस कर्मियों के नियमत: मैदानी ट्रांसफर का भी है, आखिर ये इंतजार कब खत्म होगा?

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