Sai Cabinet Decision Today: छत्तीसगढ़ में खत्म होगा वाणिज्यिक कर अधिकरण, माल एवं सेवा कर विधेयक समेत इन विधेयकों को मंजूरी, साय सरकार का बड़ा फैसला
Sai Cabinet Decision Today: राजधानी रायपुर में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक हुई। बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद मुहर लगाई गई है।
Sai Cabinet Decision Today/Image Credit: CG DPR
- राजधानी रायपुर में आज साय कैबिनेट की अहम बैठक हुई।
- बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा के बाद मुहर लगाई गई है।
- कैबिनेट की अहम बैठक सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई।
छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर विधेयक 2026 के प्रारूप को को मिली मंजूरी
मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने के साथ ही उससे संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी द्वितीय अपीलों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना भी हो चुकी है। ऐसे में पृथक वाणिज्यिक कर अधिकरण की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस संशोधन के बाद अधिकरण में लंबित प्रकरणों का स्थानांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा, (Sai Cabinet Decision Today) जिससे अपीलों के निराकरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी हो सकेगी।
माल एवं सेवा कर विधेयक 2026 के प्रारूप को मिली मंजूरी
मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। इससे कर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, करदाताओं को सुविधा मिलेगी साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन विधेयक 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है।
Sai Cabinet Decision Today: मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को तैयार करने में अन्य अग्रणी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का भी अध्ययन किया गया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
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