Pratappur School news: छत्तीसगढ़ में रोते-रोते स्कूली बच्चे पहुंचे थाने, प्रिंसिपल ने कह दी थी ये बात, अब मंत्री ने लिया तत्काल एक्शन, DEO ने भी शुरू की जांच
Pratappur School news: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जो अब नए अपडेट के साथ चर्चा में है।
surajpur news/ image source: IBC24
- सूरजपुर स्कूली बच्चे थाने पहुंचे
- प्रिंसिपल पर चोरी और प्रताड़ना आरोप
- महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने संज्ञान लिया
- वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ
सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जो अब नए अपडेट के साथ चर्चा में है। प्रतापपुर के करंजवार पूर्व माध्यमिक शाला में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे रोते-बिलखते थाने पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि स्कूल के प्रिंसिपल राजेश प्रसाद यादव ने उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी और चोरी का झूठा आरोप लगाया। बच्चों का कहना था कि गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम की तैयारी के लिए इस्तेमाल किया गया छोटा स्पीकर बॉक्स गायब हो गया था और प्रिंसिपल ने उसी की चोरी का दोष बच्चों पर मढ़ दिया।इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो में बच्चे अपनी पीड़ा और डर स्पष्ट रूप से बयां कर रहे थे। इससे पुलिस और शिक्षा विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठने लगे।
Surajpur News: महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने संज्ञान लिया
IBC24 ने इस मामले को प्रमुखता से दिखाया और खबर का व्यापक असर पड़ा। रिपोर्ट के बाद महिला बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने तुरंत संज्ञान लिया और कहा कि बच्चों के साथ इस तरह का व्यवहार गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने शिक्षा विभाग को निर्देश दिए कि मामले की पूरी जांच कराई जाए।
इस दिशा में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने एक जांच टीम का गठन किया। जांच टीम ने तुरंत स्कूल का दौरा किया और बच्चों, अभिभावकों और शिक्षक वर्ग से जानकारी एकत्रित करना शुरू किया। DEO ने कहा कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
Karanjwar Govt School: क्या है पूरा मामला
बच्चों का कहना है कि प्रिंसिपल ने पिछले तीन दिनों से उन्हें लगातार डराया और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। चोरी कबूल करने का दबाव इतना बढ़ गया कि बच्चों ने बताया कि उन्हें टीसी काटने की धमकी दी गई थी, ताकि उनका किसी अन्य स्कूल में प्रवेश न हो सके। बच्चों के डर और दबाव के कारण, वे न्याय की उम्मीद में प्रतापपुर थाने पहुंचे।
हालांकि, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय प्रिंसिपल को थाने बुलाकर समझौता कराना ही सही समझा। बच्चों को बिना किसी ठोस कार्रवाई के वापस भेज दिया गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने प्रशासन की निष्क्रियता को उजागर किया और लोगों में गहरी नाराजगी पैदा की। इस घटना ने शिक्षा विभाग और प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


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