कोरोना संक्रमण के केस आने के बाद 7 डॉक्टर हुए फरार, मोबाइल भी बंद, कलेक्टर ने माना गंभीर अपराध
कोरोना संक्रमण के केस आने के बाद 7 डॉक्टर हुए फरार, मोबाइल भी बंद, कलेक्टर ने माना गंभीर अपराध
नरसिंहपुर। जिन्हें धरती का भगवान कहा जाता है वहीं अगर मुसीबत में अपनी जिम्मेदारी को छोड़ भाग खड़े हो तो उन्हें क्या कहा जाए। आज जब सारा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है ऐसे में इन धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लेकिन नरसिंहपुर में पदस्थ 8 डॉक्टर जबलपुर में कोरोना संक्रमण के मरीज के सामने आते ही नरसिंहपुर अस्पताल से भाग खड़े हुए।
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यहां तक कि उन्होंने अपना मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिया है। जिस पर बार-बार सूचना देने पर भी यह डॉक्टर ना केवल ड्यूटी से नदारद हैं बल्कि अपने जिम्मेदारियों से विभाग रहे हैं इन आठों डाक्टरों के गैर जिम्मेदाराना रवैया को लेकर जिला अस्पताल के सिविल सर्जन ने कलेक्टर को सूचित किया।
कलेक्टर ने गंभीर अपराध मानते हुए आयुक्त कमिश्नर रविंद कुमार मिश्रा को पत्र लिख इन सभी आठ डॉक्टर के खिलाफ लोक आचरण के विपरीत आचरण दिखाने और संकट के समय मूल कर्तव्य को ना निभाते हुए कर्तव्य हीनता को लेकर पत्र लिखा है।
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उक्त चारों डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। खुद सिविल सर्जन बताती हैं कि यह सभी डॉक्टर 21 मार्च को नरसिंहपुर कलेक्टर द्वारा टोटल लॉक डाउन की घोषणा करते ही सभी डॉक्टर ड्यूटी से नदारद हो गए। जिसमें कुछ विशेषज्ञ और कुछ मेडिकल ऑफिसर है जबकि कोरोना संक्रमण के चलते नरसिंहपुर में आइसोलेशन वार्ड और क्वॉरेंटाइन होम बनाया गया है।
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ऐसे समय में डॉक्टरों की बेहद आवश्यकता के बावजूद डॉक्टर बार बार सूचित करने पर भी ड्यूटी पर हाजिर नहीं हुए और उन्होंने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। जिस पर मेरे द्वारा कलेक्टर के संज्ञान में मामला लाया गया और कलेक्टर महोदय ने इन्हें गंभीर अपराध मानते हुए जबलपुर आयुक्त को पत्र लिख कार्रवाई की मांग की है।
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