आखिर जवानों की शहादत कब तक.. एक साल पहले भी नक्सलियों ने खेला था खूनी खेल
आखिर जवानों की शहादत कब तक.. एक साल पहले भी नक्सलियों ने खेला था खूनी खेल
रायपुर, नारायणपुर। ठीक एक साल पहले नक्सलियों ने खूनी होली खेली थी। वहीं मार्च महीने में फिर से नक्सलियों ने बड़ी नक्सली वारदात को अंजाम दिया है। नक्सलियों ने डीआरजी जवानों से भरी बस को निशाना बनाया, जिससे पांच जवान शहीद हो गए। वहीं, 12 जवान घायल हो गए, जिसमें से 7 गंभीर जवानों को रायपुर रेफर किया गया है। राजधानी रायपुर के अस्पताल में घायल जवानों का उपचार जारी है। इस घटना के बाद एक बार फिर इंटेलिजेंस को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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17 जवान हुए थे शहीद
ठीक एक साल पहले 21 मार्च 2020 को नक्सलियों ने खून की होली खेली थी। नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला कर दिया था। हमला सुकमा जिले के कोराजडोंगरी के चिंतागुफा के पास हुआ था, शहीद होने वालों जवानों में डीआरजी के 12 जवान और एसटीएफ के 5 जवान थे। चिंतागुफा थाना क्षेत्र के कोराजडोंगरी में नक्सलियों को खदेड़ने के बाद जवान एंबुश में फंस गए थे। बता दें कि एक साल में डीआरजी पर नक्सलियों की यह दूसरा बड़ा नक्सली हमला है।
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राज्य के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र के जिलों में डीआरजी के जवान तैनात हैं। डीआरजी के जवान स्थानीय युवक हैं तथा क्षेत्र से परिचित हैं। पिछले कुछ वर्षों में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में डीआरजी के जवानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नक्सली मूवमेंट की मिली थी सूचना
पुलिस को नक्सली मूवमेंट की सूचना मिली थी, जिसके बाद 22 मार्च को जवानों दो की टीम दो दिवसीय ऑपरेशन दंतेवाड़ा जिले के बोदली और नारायणपुर जिले के कड़ेमेटा के लिए निकली थी। इस टीम में डीआरजी के 90 जवान भी शामिल थे। मंगलवार दोपहर जवानों की टीम जंगल से लौटकर कड़ेमेटा कैंप पहुंची। इसके बाद डीआरजी नाराणयपुर के जवानों को बस से जिला मुख्यालय के लिए रवाना किया गया। वहीं, शाम लगभग 4.15 बजे जवानों की बस को घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने कड़ेनार कैंप से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर मरोड़ा गांव के पास निशाना बनाया और ब्लास्ट किया। इसके बाद जवानों से भरी बस अनियंत्रित होकर गड्ढे में जा गिरी।
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शहीद जवानों का नाम
प्रधान आरक्षक
पवन मंडावी
जयलाल उइके
आरक्षक
सेवक सलाम
आरक्षक (चालक)
करण देहारी
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