कोरोना की मार…अपनों का वार! तमाम उपायों के बाद भी सुविधाओं पर अपने ही क्यों उठा रहे सवाल?
कोरोना की मार...अपनों का वार! तमाम उपायों के बाद भी सुविधाओं पर अपने ही क्यों उठा रहे सवाल?
भोपाल: मध्यप्रदेश में कोरोना से निपटने के सरकारी दावे लाख हो पर दावों के उलट बीजेपी के नेता, मंत्री, विधायक और सांसद ही अब सरकार और सिस्टम के फेल होने को लेकर सवाल उठा रहे हैं। प्रदेश में कोरोना से मरीजों को बिस्तर दवाओं और ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर अब तक एक दर्जन ज्यादा सत्ताधारी नेता सोशल मीडिया और बयानों के जरिए अपनी बेबसी जगजाहिर कर चुके हैं। ऐसे में सवाल है कि संकट काल में तमाम उपायों के बाद भी सुविधाओं पर अपने सवाल क्यों उठा रहे हैं? दरअसल प्रदेश सरकार के सबसे सीनियर मंत्री गोपाल भार्गव को अपने क्षेत्र के कोविड सेंटरों में डॉक्टर के इंतजाम के लिए विज्ञापन निकालवना पड़ा।
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केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री प्रह्लाद पटेल के भतीजे और बीजेपी विधायक जालम सिंह के पुत्र मोनू पटेल ने सोशल मीडिया पर खुलकर सरकार के फेल होने का आरोप लगाते हुए अपनी लाचारी जाहिर की। इससे पहले बीजेपी विधायक नारायण त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सिस्टम के फेल होने की दुहाई देते हुए प्रदेश को बचाने की सार्वजनिक अपील कर चुके हैं। वहीं प्रदेश सरकार में मंत्री दर्जा प्राप्त खनिज निगम के अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल भी कह चुके हैं कि सरकार केवल मीटिंग में व्यस्त है और लोगों को इलाज नहीं मिल रहा है।
ये केवल महज कुछ उदाहारण है। इनके अलावा भी बीजेपी के कई जिला अध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष अपनी सरकार होते हुए हुए भी अपने परिजनों का इलाज के अभाव में दम तोड़ने पर सोशल मीडिया से लेकर हर जगह अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके है। जाहिर है कोरोना की दूसरी लहर ने मध्यप्रदेश के हेल्थ सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। राजधानी सहित प्रदेश के ज्यादातर जिलों में तमाम संघर्ष करने के बाद ना तो अस्पताल में बेड मिल रहा है और न ही ऑक्सीज, न ही रेमेडिसीवर इंजेक्शन। हालांकि सरकार की और से बार-बार आंकड़ों की दुहाई और व्यवस्था दुरस्त होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी ओर अपनों से घिरी सरकार अब विपक्ष के निशाने पर है।
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बहरहाल प्रदेश में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण पर समीक्षा बैठक का सिलसिला जारी है। इन बैठकों में आंकड़ों में सब कुछ ठीक होने का दावा किया जा रहा है पर बीजेपी नेताओं के इन बयानों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओ में खुद अपनी ही सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर किस हद तक नाराजगी है। सरकार भले आंकड़ों के जरिए सबकुछ ठीक होने का दावा कर रही हो, लेकिन उसके उल्ट प्रदेश तस्वीर आम आदमी को परेशान करने वाली ही है।

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