घरौंदा दुष्कर्म मामले में अधीक्षिका की भूमिका संदिग्ध, 5 बार नोटिस मिलने के बाद भी नहीं पहुंची बयान देने

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घरौंदा दुष्कर्म मामले में अधीक्षिका की भूमिका संदिग्ध, 5 बार नोटिस मिलने के बाद भी नहीं पहुंची बयान देने

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  • Publish Date - April 8, 2019 / 05:17 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:17 PM IST

रायपुर: कोपलवाणी स्थित आश्रय गृह घरौंद में मानसिक रूप से कमजोर युवती के साथ दुष्कर्म में पेंच अब फंसते जा रहा है। मामले में जाच की कार्रवाई तीन महीने बाद भी पूरी नहीं हो पाई है। मामला गंभीर होने के बावजूद संस्था के जिम्मेदार जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। लगातार पांच बार नोटिस भेजने के बाद भी अधिक्षिका मेघा तिवारी अपना बयान दर्ज कराने से बचते हुए नजर आ रहीं हैं। छात्रावास अधिक्षिका को अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद जांच अधिकारी दो दिन के भीतर जिला कलेक्टर को अपना रिपोर्ट सौंपेंगे।

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जांच अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान संस्था की कई खामियां सामने आई हैं। पूरे मामले में अधीक्षिका की भूमिका संदिग्ध है। मामले में 15 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। अधीक्षिका को 8 अप्रैल को सुबह 11.30 बजे कलक्टर कार्यालय के कक्ष क्रमांक 12 में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले अधीक्षिका को बयान के लिए 13 मार्च, 26 मार्च, 29 मार्च, 3 अप्रैल और 8 अप्रैल को उपस्थित होने का नोटिस जारी किया गया था, लेकिन वो नहीं पहुंचीं।

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17 जनवरी को राज्य सरकार के समाज कल्याण विभाग ने मंत्रालय से कलक्टर रायपुर को पत्र भेजकर मामले की दंडाधिकारी जांच अपर कलक्टर स्तर के अधिकारी से करवाने के निर्देश दिए थे। शासन के निर्देश पर कलक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. बसवराजु एस ने जांच का आदेश जारी किया था। आदेश में कहा गया है कि यह समिति घटना के प्रत्येक आवश्यक बिन्दु की सिलसिलेवार जांच की जाए।

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ये है पूरा मामला
कोपलवाणी के कोटा स्थित आश्रयगृह में मानसिक रूप से कमजोर युवती के साथ डॉक्टर द्वारा दुष्कर्म करने की बात सामने आई थी। युवती के परिजनों ने इसकी शिकायत सरस्वती नगर थाने में 12 जनवरी को की थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी डॉक्टर को जेल भेज दिया था। हॉस्टल में चेकअप करने आए आरोपी फिजियोथैरेपिस्ट डॉ. अजय साहू ने मनोरोगी युवती के साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था।

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