पब्लिक परेशान…मंत्री कहां व्यस्त…आखिर क्या है सच?
पब्लिक परेशान...मंत्री कहां व्यस्त...आखिर क्या है सच?
भोपाल: सारे देश में कोरोना की बेलगाम रफ्तार ने सरकारी सिस्टम की सांसें फुला दी हैं। हालांकि प्रदेश सरकार संक्रमण से निपटने के लिए कवायद करती दिखती है, लेकिन जमीनी हकीकत कम से कम वैसी नहीं है जिसके सरकार दावे करती है। अस्पतालों में बेड की उपलब्धता, ऑक्सीजन की कमी इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। दावा है कि सभी इंतजाम दुरूस्त किए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ ऑक्सीजन की किल्लत से जूझते अस्पतालों में मरीज दम तक तोड़ने की बातें सामने आ रही हैं। आखिर सच क्या है?
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कोरोना संक्रमण पर काबू पाने प्रदेश सरकार हर संभव कोशिश करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हालात क्या है? ये जानने के लिए जानिए भोपाल के सिटी अस्पताल का हाल, जहां पिछले 24 घंटे में ऑक्सीजन की कमी से 5 लोगो की मौत हुई है।
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वैसे ये आलम अकेले भोपाल सिटी अस्पताल की ही नहीं है, राजधानी के बाकि अस्पताल भी ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं। भोपाल में वैष्णो अस्पताल के डॉ परिहार ने प्रशासन से ऑक्सीजन सप्लाई की गुहार लगाई है जो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है।
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इधर,सरकार बार-बार व्यवस्थाओं के दुरस्त होने का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर ऑक्सीजन की कमी से जूझते अस्पतालों को आस है जल्दी राहत की। अब जानिए ऑक्सीजन की सरकारी सप्लाई करने वाली सबसे बड़ी कंपनी आईनॉक्स का हाल, जहां क्या अस्पताल, क्या आम परिजन घंटों ऑक्सीजन के लिए इंतजार के लिए कतार में दिखे।
साफ है कि इस घोर संकटकाल में दावों और आंकड़ों की उलझन के इतर है कड़वी हकीकत, जो हमने आपको बताई। सरकार व्यवस्था सुधारने को लेकर लगातार कवायद करती दिख रही है। लेकिन सच्चाई सबके सामने है, जो प्रितदिन अस्पतालों और मरीजों को बेहद चिंता में डाल रही है।

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