‘बंद’ हाफ…सियासत फूल! हाफ डे की बंद पॉलिटिक्स के पीछे छिपी है कांग्रेस की निकाय चुनाव की तैयारी?

'बंद' हाफ...सियासत फूल! हाफ डे की बंद पॉलिटिक्स के पीछे छिपी है कांग्रेस की निकाय चुनाव की तैयारी?

‘बंद’ हाफ…सियासत फूल! हाफ डे की बंद पॉलिटिक्स के पीछे छिपी है कांग्रेस की निकाय चुनाव की तैयारी?
Modified Date: November 29, 2022 / 08:44 pm IST
Published Date: February 20, 2021 5:47 pm IST

भोपाल: पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में बढोत्तरी के खिलाफ मध्यप्रदेश कांग्रेस ने आधे दिन राज्यव्यापी बंद बुलाया। केंद्र और राज्य सरकार को घेरने दिग्विजय सिंह समेत कई दिग्गज नेता कार्यकर्ता सड़क पर उतरे, भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर समेत कई शहरों में बंद का असर दिखा। हालांकि बीजेपी ने बंद को पूरी तरह से फ्लॉप करार देते हुए कांग्रेस पर राजनीति करने का आरोप लगाया। ऐसे में सवाल यही है कि कांग्रेस की हाफ डे की बंद पॉलिटिक्स के पीछे निकाय चुनाव की तैयारी छिपी है?

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तस्वीरें भोपाल में सुबह 8 बजे की है जब कांग्रेस के नेता पेट्रोल पंप बंद करवाने के लिए पहुंचे। विधायक पीसी शर्मा की अगुआई में पेट्रोल पंप के साथ साथ पूरे बाजार को बंद करवाने के लिए कांग्रेस ने व्यापारियों से मदद मांगी। पीसी शर्मा नए भोपाल में सक्रिय रहे तो पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पुराने भोपाल में मोर्चा संभाला। कुछ देर के लिए पुलिस ने पीसी शर्मा और उनके कुछ समर्थकों को हिरासत में भी रखा। इंदौर में भी बंद का खासा असर देखने को मिला यहां पेट्रोल पंप एसोसिएशन ने भी बंद का समर्थक करते हुए पेट्रोल पंप बंद रखे। जबलपुर में कांग्रेस संगठन के नेताओं ने जहां बड़ा फुहारा, कोतवाली, सराफा बाजार में बंद करवाया वहीं कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ ने जिला अदालत बिल्डिंग के पास मार्केट को नहीं खुलने दिया। ग्वालियर में भी बंद का मिला जुला असर देखने को मिला। वैसे कांग्रेस के इस विरोध को यदि प्रदेश स्तर पर देखा जाए तो ये कहा जा सकता है इस बार पार्टी एकजुट नजर आई और शहरी ग्रामीण दोनों ही इलाकों में कांग्रेस ने सक्रियता दिखाई।

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महंगाई पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता के सहयोग से कांग्रेस उत्साह में है। पार्टी का आरोप है कि पिछले 11 दिन से प्रदेश में पेट्रोल की कीमते बढ़ते-बढ़ते 100 तक पहुंच गई है लेकिन राज्य सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के मुताबिक मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर 33 फीसदी वैट, 4.50 रुपए एडिशनल टैक्स और 1 फीसदी प्रति लीटर सेस लगता है। इसलिए बीजेपी सरकार को जनता को राहत देने के लिए टैक्स में कमी करना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने बंद को पूरी तरह फ्लॉप करार दिया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इससे आम जनता परेशान होती है।

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वैसे मध्यप्रदेश भारत के उन राज्यों में शामिल हैं जहां पेट्रोलिएम पदार्थों पर सबसे ज्यादा टैक्स लगता है। इसके अलावा अगले कुछ दिनों में निकाय चुनाव होना है इसलिए कांग्रेस की कोशिश है कि महंगाई के मुद्दे को लगातार हवा दी जाए, क्योंकि किसान आंदोलन के साथ साथ महंगाई का मुद्दा बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।

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