बंगाल चुनाव के प्रत्येक चरण में केंद्रीय बलों की 2,500 कंपनियां तैनात की जा सकती हैं: सीईओ
बंगाल चुनाव के प्रत्येक चरण में केंद्रीय बलों की 2,500 कंपनियां तैनात की जा सकती हैं: सीईओ
कोलकाता, 16 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रत्येक चरण में स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2,000 से 2,500 कंपनियां तैनात कर सकता है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को यह कहा।
यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अग्रवाल ने कहा कि आयोग दो चरणों में होने वाले चुनावों के दौरान केंद्रीय बलों की तैनाती के लिए अभूतपूर्व दृष्टिकोण अपनाने को तैयार है।
अग्रवाल ने कहा, ‘हमारा एकमात्र लक्ष्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है। प्रत्येक चरण में केंद्रीय बलों की लगभग 2,000 से 2,500 कंपनियों की आवश्यकता हो सकती है।’
केंद्रीय बलों की प्रत्येक कंपनी में आमतौर पर 100 से 135 कर्मी होते हैं।
उन्होंने कहा कि मतदान के दिन व्यवस्था बनाए रखने और बूथ पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से निपटने में सुरक्षा बल महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
अग्रवाल ने कहा, ‘मतदान केंद्रों पर किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर केंद्रीय बल स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार होंगे। यदि उन्हें कोई अनैतिक गतिविधि दिखाई देती है तो वे तुरंत इसकी सूचना अपने वरिष्ठ अधिकारियों को देंगे।’
सीईओ ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि केंद्रीय बलों के किसी भी दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘केंद्रीय बल कानून के अनुसार ही सख्ती से काम करेंगे और किसी भी प्रकार की लापरवाही सिद्ध होने या दुरुपयोग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’
इस बीच, चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से निर्वाचन आयोग ने राज्य के प्रत्येक थाने को बृहस्पतिवार तक अपने अधिकार क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
रिपोर्ट में क्षेत्र में अवैध हथियारों की जानकारी, पहचाने गए असामाजिक तत्वों और अपराध से संबंधित अन्य आंकड़ों को शामिल किया जाना चाहिए।
अग्रवाल ने कहा, “प्रत्येक थाने के प्रभारी अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाला इलाका अपराध मुक्त हो। आयोग अर्धसैनिक बलों की तैनाती सहित सभी आवश्यक सहायता प्रदान करेगा।”
उन्होंने कहा कि निर्देशों के बावजूद यदि चुनाव से संबंधित कोई हिंसा होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीईओ ने कहा, ‘‘सभी प्रकार की सहायता के बाद भी यदि किसी विशेष क्षेत्र में मतदान के दौरान हिंसा होती है तो जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू की जाएगी।’
चुनाव निगरानी को और सख्त करने के लिए आयोग ने मतदान के दौरान प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी पर काफी हद तक निर्भर रहने का फैसला किया है।
अग्रवाल के अनुसार, सभी मतदान केंद्रों में 100 प्रतिशत ‘वेबकास्टिंग’ अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस बार प्रौद्योगिकी आधारित निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। सभी मतदान केंद्रों में ‘वेबकास्टिंग’ अनिवार्य होगी। ‘वेबकास्टिंग’ बंद होने पर मतदान रोक दिया जाएगा। यदि यह एक घंटे से अधिक समय तक बंद रहता है तो उस केंद्र में दोबारा मतदान कराने पर विचार किया जा सकता है।’
राज्य के चुनावी इतिहास में पहली बार बड़े जनसमूहों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के लिए ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
इसके अलावा, मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर सूक्ष्म पर्यवेक्षकों को तैनात किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के सिलसिले में अब तक करीब 112 करोड़ रुपये की अवैध नकदी और सामग्री जब्त की जा चुकी है।
काले धन की बरामदगी के आधार पर 55 विधानसभा क्षेत्रों को संवेदनशील क्षेत्रों के रूप में चिह्नित किया गया है।
चुनाव की समग्र स्थिति पर नजर रखने के लिए सीईओ के कार्यालय में एक राज्य-स्तरीय नियंत्रण केंद्र स्थापित किया गया है।
पहली बार विभिन्न पर्यवेक्षकों के कार्यों की समीक्षा करने के लिए आईएएस अधिकारियों से युक्त एक ‘पर्यवेक्षक प्रकोष्ठ’ भी बनाया गया है।
चुनाव आयोग के एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि पुलिस पर्यवेक्षकों के मंगलवार को राज्य में पहुंचने की उम्मीद है।
सीईओ ने कहा, ‘अठाईस पुलिस जिलों और छह आयुक्तालयों में से प्रत्येक में दो पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए जाएंगे, जबकि कोलकाता के आकार को देखते हुए वहां पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाई जाएगी।’
आयोग ने कहा कि विधानसभा के 294 निर्वाचन क्षेत्रों में से प्रत्येक में एक सामान्य पर्यवेक्षक होगा।
अधिकारियों ने बताया कि मतदान से पांच दिन पहले बूथ स्तर के अधिकारी (बीएलओ) मतदाताओं को मतदाता पर्ची वितरित करेंगे।
भाषा शुभम सुरेश
सुरेश

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