Joint ITR Formula: ‘टैक्स बचाना है तो शादी कर लो!’.. संसद में ये क्या बोल गए राघव चड्ढा? सुनकर बाकी सांसद भी नहीं रोक पाए अपनी हंसी, जानिए क्या है पूरा माजरा

'टैक्स बचाना है तो शादी कर लो!'.. संसद में ये क्या बोल गए राघव चड्ढा? सुनकर बाकी सांसद भी नहीं रोक पाए अपनी हंसी, Raghav Chadha Gave Formula for joint ITR

Joint ITR Formula: ‘टैक्स बचाना है तो शादी कर लो!’.. संसद में ये क्या बोल गए राघव चड्ढा? सुनकर बाकी सांसद भी नहीं रोक पाए अपनी हंसी, जानिए क्या है पूरा माजरा
Modified Date: March 16, 2026 / 08:22 pm IST
Published Date: March 16, 2026 7:53 pm IST

नई दिल्ली: Joint ITR Formula: AAP सांसद राघव चड्डा ने संसद में एक दिलचस्प सुझाव दिया है, जिसे सुनकर कई सांसद हंस पड़े। चड्डा ने कहा, “टैक्स बचाना है तो शादी कर लो।” उनका यह बयान दरअसल नए “जॉइंट ITR” सिस्टम से जुड़ा था, जिसमें पति-पत्नी दोनों की इनकम को मिलाकर टैक्स रिबेट और बचत को साझा करने का प्रावधान है। संसद में चड्डा ने बताया कि वर्तमान में भारत में पति-पत्नी की आमदनी को अलग-अलग टैक्स स्लैब के तहत वसूला जाता है। जबकि घर में खर्चे और निवेश दोनों की आमदनी से जुड़े होते हैं। इसके चलते दोनों को अलग-अलग टैक्स देना पड़ता है। उन्होंने बताया कि दुनिया के कई देशों में पति-पत्नी को एक इकॉनोमिक यूनिट माना जाता है और टैक्स भी संयुक्त रूप से भरा जाता है।

दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुपूरक अनुदान मांगों से संबंधि बिल पेश किया। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अनुपूरक अनुदान मांगों से संबंधि बिल पेश किया। इसकी चर्चा में भाग लेते हुए राघव ने कहा कि मौजूदा समय में भारत अलग-अलग (व्यक्तिगत) टैक्स वसूला जाता है। इसके चलते शादीशुदा पति-पत्नी भी अलग-अलग टैक्स भरते हैं और इनकम टैक्स रिटर्न को फाइल करते हैं। उनकी इनकम को मिलाया नहीं जाता है। जबकि दोनों के लंबे समय में होने वाले निवेश एक ही हैं। घर में होने वाले उनके खर्चे एक ही हैं। बच्चों की परवरिश से लेकर कई तरह के खर्चे एक ही हैं।

दुनिया के कई देश पति-पत्नी को मानते इकॉनोमिक यूनिट

Joint ITR Formula: चड्डा ने सदन को बताया- दुनिया के कई देशों में पति-पत्नी को एक इकॉनोमिक यूनिट की तरह माना गया है और इनकम टैक्स को एक साथ फाइल करने का प्रावधान रखा गया है। भारत में पति-पत्नी खर्चे तो एक साथ वहन करते हैं, लेकिन जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो उन्हें अपरिचित करार दे दिया जाता है। सांसद ने अपनी बात को 3 उदाहरण के जरिए समझाया।

ITR की ज्वाइंट फाइलिंग से लोगों को होगा लाभ

दोनों उदाहरण रखने के बाद राघव चड्डा ने कहा- अगर इनकम टैक्स की जॉइंट फाइलिंग होगी, तो इन शादीशुदा लोगों को ज्यादा लाभ मिल सकेगा। इसके लिए उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया- एक शादीशुदा कपल है। पति-पत्नी दोनों कमाते हैं। अपने खर्चे भी शेयर करते हैं। पति साल का 18 लाख कमाता और पत्नी 6 लाख। इस तरह कुल इनकम 24 लाख होती है। अब जब इनकम टैक्स भरने की बात आती है, तो पति इनकम टैक्स के हिसाब से करीब 150000 रुपये टैक्स भरता है और पत्नी शून्य। मतलब परिवार को कुल 1 लाख 50 हजार रुपये टैक्स देने होते हैं।

इनकम के साथ रिबेट भी जुड़ने से होगा फायदा

राघव चड्डा ने हाइपोथिटिकल सिचुएशन को समझाते हुए कहा- अगर इनकी इनकम और रिबेट को मिला दिया जाए, तो इनकी कुल आमदनी 24 लाख रुपये और रिबेट भी 24 लाख रुपये होगा, तो दोनों को घटाने पर इनकम टैक्स शून्य हो जाएगा। इसलिए मैं प्रस्ताव रखता हूं कि भारत में इनकम टैक्स फाइल करने का ज्वाइंट सिस्टम लाया जाए।

इन्हें भी पढ़ें:-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।