30 वर्ष बाद बन रहा है एक साथ शोभन योग,गजकेसरी योग और बुद्धादित्य योग

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30 वर्ष बाद बन रहा है एक साथ शोभन योग,गजकेसरी योग और बुद्धादित्य योग

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  • Publish Date - November 18, 2017 / 06:05 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:06 PM IST

आज  मार्गशीर्ष शनि अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है।   इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या के समान है.कहा जाता है कि  अगहन अमावस्या को श्रीकृष्ण व लक्ष्मी पूजन करने का विधान है.  विष्णु पुराण के अनुसार मार्गशीर्ष अमावस्या के विशेष पूजन, स्नान, उपाय व उपवास से पितृगण के साथ-साथ ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, सूर्य, अग्नि व समस्त भूत प्राणीयों को भी तृप्ती मिलती है तथा पितृ दोष, संतानहीन योग व राहू दोष से छुटकारा मिलता है तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इस दिन शनिवार होने के कारण 30 वर्ष बाद शोभन योग गजकेसरी योग बुद्धादित्य योग बन रहा है.

भविष्यपुराण के अनुसार शनिश्चरी अमावस्या शनि को अधिक प्रिय है। शनि अमावस्या का दिन संकटों के समाधान के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दिन शनिदेव अपने भक्तों पर कृपा बरसाकर उन्हें कष्टों से भी मुक्ति दिलाते हैं.  

विशेष पूजन: श्रीकृष्ण, मां लक्ष्मी व शनि देव का संयुक्त रूप से विधिवत पूजन करें, तिल के तेल का दीप करें, चंदन से धूप करें, पीपल के पत्ते चढ़ाएं रोली, चंदन व सिंदूर चढ़ाएं। तिल जौ व अक्षत चढ़ाएं। खीर का भोग लगाएं व 1-1 माला इन विशिष्ट मंत्रों का जाप 108 बार करें। इसके बाद भोग किसी ब्राह्मण को दे दें. 

लक्ष्मी पूजन मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं माया-पुर्यै नमः॥

कृष्ण पूजन मंत्र: ॐ क्लीं कमला-नाथाय नमः॥

शनि पूजन मंत्र: शं शनैश्चराय कर्मकृते नमः॥

उपाय

राहू दोष से मुक्ति हेतु 4 सिक्के जलप्रवाह करें। 

संतानहीनता से मुक्ति हेतु दंपत्ति कृष्ण मंदिर में कटहल चढ़ाएं।

संकटों के समाधान हेतु सरसों का तेल लगी गुड़ की रोटी काले कुत्ते को खिलाएं।