मुश्किल शुरुआत के बाद अमेरिका, ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दिन पूरा

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मुश्किल शुरुआत के बाद अमेरिका, ईरान के बीच बातचीत का दूसरा दिन पूरा

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 03:59 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 03:59 PM IST

ओबबुर्गेन (स्विटजरलैंड), 22 जून (एपी) अमेरिका एवं ईरान के वरिष्ठ वार्ताकारों ने सोमवार को शुरुआती बातचीत का एक लंबा दौर पूरा कर लिया है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाना था।

स्विट्जरलैंड में मध्यस्थता की कोशिश रविवार को शुरू हुई और इसमें कुछ उतार-चढ़ाव भी आए, लेकिन इससे दोनों पक्षों के बीच कुछ समझौते भी हुए।

मध्यस्थता कर रहे देशों -कतर और पाकिस्तान- ने बातचीत के दौरान हुई “उत्साहजनक प्रगति” की सराहना की, क्योंकि ईरान एवं अमेरिका, लेबनान में जारी लड़ाई से निपटने के लिए एक तनाव नियंत्रण समन्वय प्रकोष्ठ (डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल) बनाने पर सहमत हुए। अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक ने कई मोर्चों पर प्रगति का दावा किया है। इनमें वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अहम जलमार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को खुला रखने के लिए ‘तंत्र’ बनाना और दक्षिणी लेबनान में संघर्ष-विराम को बनाए रखना शामिल है।

फिर भी, कतर और पाकिस्तान के अधिकारियों की मौजूदगी में अमेरिका और ईरान के बीच हो रही बातचीत को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों से झटका लगा। ट्रंप स्विट्जरलैंड में ल्यूसर्न झील के पास पहाड़ों पर बने एक रिसॉर्ट में बातचीत वाली जगह से हजारों मील दूर बैठकर ऐसी बातें कह रहे थे, जिनसे ईरानी पक्ष में नाराजगी थी।

ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि “अमेरिकी राष्ट्रपति के अपमानजनक संदेश के प्रकाशन” के बाद बातचीत स्थगित कर दी गई।

सरकारी मीडिया के अनुसार, इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कतर के मध्यस्थों से मुलाकात की और बातचीत वाली जगह से चले गए। हालांकि, वार्ता के बारे में पत्रकारों को जानकारी देने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने नाम न बताने की शर्त पर रविवार देर रात कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल वहीं मौजूद रहा और बातचीत जारी रही।

ईरान के सरकारी टेलीविजन ने सोमवार को बताया कि ईरानी प्रतिनिधि शिखर सम्मेलन वाली जगह से ज़्यूरिख़ हवाई अड्डे के लिए रवाना हो गये हैं, जहां से वे लोग तेहरान लौटेंगे।

सरकारी मीडिया के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने संकल्प व्यक्त किया था कि वह “यूरेनियम को संवर्धित करने के अधिकार से कभी पीछे नहीं हटेंगे।” बाद में, एक समाचार चैनल के रिपोर्टर के मुताबिक, ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को फोन पर दिए साक्षात्कार में कहा कि पेजेश्कियान को सोच-समझकर बोलना चाहिए। उन्होंने, साथ ही, ईरान पर कब्जा करने की धमकी भी दी।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी ईरान को चेतावनी देना जारी रखते हुए कहा, ‘‘ईरान को अत्यधिक भुगतान वाले अपने प्रॉक्सी बलों को लेबनान में तुरंत परेशानी पैदा करने से रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते, तो हम ईरान पर फिर से बहुत कठोर हमला करेंगे… इस बार पहले की तुलना में और भी ज्यादा कठोर हमले होंगे।”

अमेरिका की ओर से मुख्य वार्ताकारों में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर शामिल हैं। ईरान का प्रतिनिधित्व ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची कर रहे हैं।

यह साफ नहीं है कि वेंस स्विट्जरलैंड से कब रवाना होंगे, हालांकि उन्होंने शनिवार को फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें लगता है कि वे लोग यहां सिर्फ “एक या दो दिन” ही रुकेंगे। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की ओर से कुशनर और विटकॉफ ज्यादातर तकनीकी मामलों को संभाल रहे हैं।

पाकिस्तान और कतर ने एक संयुक्त बयान में कहा कि उच्चस्तरीय बातचीत खत्म हो गई है और तकनीकी बातचीत स्विट्जरलैंड में इस हफ्ते जारी रहेगी।

बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए एक “संचार लाइन” बनाने और साथ ही लेबनान में इजराइल और ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिज्बुल्ला के बीच लड़ाई खत्म करने के लिए एक तंत्र स्थापित करने पर सहमत हुए हैं।

अमेरिका ने इस पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की, जबकि ईरान ने मध्यस्थों के काम की तारीफ की।

अराघची ने ‘एक्स’ पर लिखा कि पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों ने “लेबनान युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति” की है।

उन्होंने आगे कहा कि बातचीत की पहली “असली परीक्षा” यह होगी कि क्या यह तरीका इजराइल और हिज्बुल्ला के बीच लड़ाई रोकने में सफल होता है या नहीं।

अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक ने बताया कि जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें होर्मुज जलडमरूमध्य के बारे में ईरान का बयान भी शामिल था। ईरान की सेना ने कहा था कि लेबनान में जारी लड़ाई के जवाब में उसने शनिवार को इसे बंद कर दिया था। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमान ने इस बात का खंडन किया है कि ईरान ने जलडमरूमध्य को फिर से बंद किया है।

पिछले हफ्ते अमेरिका और ईरान के नेताओं के बीच ईरान में लड़ाई खत्म करने के लिए एक अंतरिम समझौता हुआ। इस समझौते में बातचीत करने वालों के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है, ताकि वे तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर कोई फैसला ले सकें। यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब इस बात की चिंता जताई जा रही है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम का इस्तेमाल सैन्य मकसद के लिए करना चाहता है, हालांकि ईरान इस दावे को नकारता है।

दूसरे मुश्किल मुद्दों के साथ-साथ, ईरान की जब्त की गई संपत्ति का मामला भी एजेंडा में शामिल है।

बातचीत में हालांकि कई जटिल मुद्दों पर चर्चा होगी, लेकिन ईरान सबसे पहले लेबनान में चल रही लड़ाई को सुलझाने पर ध्यान देना चाहता है।

सोमवार को लेबनान में सावधानी भरी शांति रही; रविवार को शांति रहने के बाद रात भर इजराइल की ओर से कोई हमला नहीं हुआ। इसी तरह, हिज्बुल्ला ने भी शनिवार के बाद से इजराइली सेना पर किसी हमले की घोषणा नहीं की है।

इजराइल-हिज्बुल्ला के बीच दो मार्च को शुरू हुई ताजा लड़ाई के बाद से लेबनान में आई यह शांति सबसे लंबी है।

एपी प्रशांत सुरेश

सुरेश