फरीदाबाद के 500 परिवार 20 साल से सरकारी जलापूर्ति से वंचित; मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

फरीदाबाद के 500 परिवार 20 साल से सरकारी जलापूर्ति से वंचित; मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

फरीदाबाद के 500 परिवार 20 साल से सरकारी जलापूर्ति से वंचित; मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब
Modified Date: September 2, 2026 / 03:02 pm IST
Published Date: September 2, 2026 3:02 pm IST

चंडीगढ़, दो सितंबर (भाषा) हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने उस शिकायत का गंभीर संज्ञान लिया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फरीदाबाद की एक आवासीय सोसाइटी में रह रहे लगभग 500 परिवार को 20 साल से अधिक समय से सरकारी पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही है।

आयोग ने संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और अंतरिम अवधि में सोसाइटी के निवासियों को सरकारी टैंकरों के जरिये मुफ्त और निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

एचएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा ने सुनवाई के दौरान कहा कि सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल मिलना केवल नागरिक सुविधा नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा के लिए आवश्यक है।

आयोग को दी गई शिकायत में फरीदाबाद के सेक्टर 49 स्थित ‘अचीवर्स सोसाइटी’ (कालिंदी हिल) के निवासियों ने बताया कि इस सोसाइटी को 2004-05 के दौरान ‘टीपी-3’ योजना के तहत विकसित किया गया था।

शुरुआत में सोसाइटी के निवासी परिसर में खोदे गए बोरवेल और निजी पानी टैंकरों के सहारे काम चलाते थे। समय के साथ बोरवेल सूख गए, जिससे निवासियों को अपनी रोजमर्रा की घरेलू जरूरतें पूरी करने के लिए स्थायी रूप से निजी टैंकरों से पानी खरीदने को मजबूर होना पड़ा।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह केवल अनियमित या अपर्याप्त जलापूर्ति का मामला नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सोसाइटी में दो दशक से अधिक समय से सरकारी जलापूर्ति की कोई व्यवस्था नहीं है।

आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की व्यापक व्याख्या का उल्लेख करते हुए कहा कि उच्चतम न्यायालय ने कई फैसलों में गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार और स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा माना है।

न्यायमूर्ति बत्रा ने ए.पी. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बनाम एम.वी. नायडू मामले में की गई शीर्ष अदालत की टिप्पणियों का हवाला दिया, जिसमें पेयजल मिलने को जीवन के लिए मौलिक अधिकार माना गया था।

आयोग ने हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 267 का भी हवाला दिया और कहा कि ‘‘पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल आपूर्ति’’ अधिनियम के तहत निर्धारित आंतरिक सेवाओं का हिस्सा है।

आयोग ने 27 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि यदि निवासियों का आरोप सही पाया जाता है, तो यह जांच करना आवश्यक होगा कि संबंधित प्राधिकरण ने अपने वैधानिक दायित्व का निर्वहन किया या नहीं।

आदेश के अनुसार, शहर के नगर निगम आयुक्त और फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को अगली सुनवाई की तारीख से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 12 नवंबर को निर्धारित की गई है।

एचएचआरसी के सहायक पंजीयक डॉ. पुनीत अरोड़ा ने कहा कि आयोग के अध्यक्ष ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि स्थायी समाधान होने तक सोसाइटी के निवासियों को सरकारी टैंकरों के जरिये मुफ्त और निर्बाध जलापूर्ति की जाए।

भाषा

देवेंद्र सुभाष

सुभाष


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