“संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ से दक्षिणपंथी ताकतों को होगा फायदा: पूर्व सांसद अली अनवर

“संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ से दक्षिणपंथी ताकतों को होगा फायदा: पूर्व सांसद अली अनवर

“संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ से दक्षिणपंथी ताकतों को होगा फायदा: पूर्व सांसद अली अनवर
Modified Date: September 2, 2026 / 04:27 pm IST
Published Date: September 2, 2026 4:27 pm IST

नयी दिल्ली, दो सितंबर (भाषा) ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद अली अनवर अंसारी ने “संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ का विरोध करते हुए बुधवार को कहा कि इस तरह की पहल से समाज में ध्रुवीकरण बढ़ेगा और दक्षिणपंथी ताकतों को इसका फायदा मिलेगा।

राज्यसभा के पूर्व सदस्य ने यह भी कहा कि बेहतर होता कि मुस्लिम संगठन भावनात्मक मुद्दों के बजाय जन सरोकार के मसले उठाते तो देश के सभी वर्गों का उन्हें समर्थन मिलता।

उन्होंने एक बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए अभी इस तरह के ‘मजहबी’ अभियानों से दूर रहने की जरूरत है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 17 सतंबर से “संविधान और शरिया संरक्षण आंदोलन’’ चलाने की घोषणा की है। यह फैसला 31 अगस्त को यहां बोर्ड की एक बैठक में लिया गया।

बोर्ड ने कहा कि संविधान, धार्मिक स्वतंत्रता, न्याय और समानता के संरक्षण के लिए देशव्यापी जन आंदोलन शुरू किया जाएगा जिसमें समाज के सभी न्यायप्रिय एवं लोकतांत्रिक लोगों को शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।।

इस फैसले पर प्रतिक्रया व्यक्त करते हुए ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के अध्यक्ष अंसारी ने कहा कि शरीयत बचाओ जैसे ‘जज्बाती-मजहबी’ नारों के साथ अभियान से धार्मिक ध्रुवीकरण का खतरा है।

उन्होंने कहा, “वैसे भी फिलहाल शरिया पर कोई नया खतरा नहीं दिख रहा है। अलबत्ता एसआईआर (मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण) और परिसीमन तथा मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाना व पूरे देश में खासतौर पर मुसलमानों को निशाना बनाये जाने की बात जरूर सामने आ रही है। कुल मिलाकर लोकतंत्र और संविधान पर खतरा साफ दिख रहा है।”

अंसारी ने कहा कि अगर धार्मिक नेता भावनात्मक मुद्दों की जगह आम सरोकार वाली बातों को लेकर अभियान चलाते तो हर धर्म के लोगों की सहानुभूति और समर्थन उन्हें मिल सकता था।

पूर्व सांसद ने कहा है कि ऐसी स्थिति में इस तरह के अभियान शुरू करने से दक्षिणपंथी ताकतों को ही फायदा होने वाला है।

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव


लेखक के बारे में