नयी दिल्ली, 31 जुलाई (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि 26 जुलाई तक देश के आदिवासी बहुल इलाकों में सिकल सेल एनीमिया बीमारी का पता लगाने के लिए 7.25 करोड़ से ज्यादा स्क्रीनिंग की जा चुकी हैं।
नड्डा ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और अस्पताल राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग, दवाएं खरीदने और मौजूदा ब्लड बैंकों को मज़बूत करने या नए ब्लड बैंक बनाने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता देता है।
यह सहायता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यक्रम क्रियान्वयन योजनाओं (पीआईपी) के तौर पर मिले प्रस्तावों के आधार पर दी जाती है।
राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत, महाराष्ट्र समेत आदिवासी आबादी वाले 17 राज्यों में सिकल सेल बीमारी (एससीडी) का पता लगाने के लिए 0-40 साल की उम्र के लोगों की स्क्रीनिंग (जांच) की जाती है। यह स्क्रीनिंग जिला अस्पतालों से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर तक सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर होती है।
नड्डा ने कहा, ‘‘एससीडी पोर्टल पर राज्यों की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जुलाई तक देश के आदिवासी बहुल इलाकों में 7.25 करोड़ से ज़्यादा स्क्रीनिंग की गई हैं, जिनमें महाराष्ट्र में 1.11 करोड़ स्क्रीनिंग शामिल हैं।’’
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने अलग-अलग राज्यों में एससीडी पर उत्कृष्टता केंद्र बनाने के लिए लागत के नियम तय किए हैं। इन केंद्रों को जनजातीय कार्य मंत्रालय से कोष मिलता है।
नड्डा ने कहा कि एससीडी से पीड़ित मरीज़ों को जीवनशैली प्रबंधन और शादी व बच्चे के जन्म से पहले के फ़ैसलों के बारे में काउंसलिंग दी जाती है।
भाषा वैभव अविनाश
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