कामकोटि के बारे में प्रियंका की टिप्पणी वैज्ञानिक, अकादमिक समुदाय का ‘अपमान’: सीएसजेएमयू कुलपति

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कामकोटि के बारे में प्रियंका की टिप्पणी वैज्ञानिक, अकादमिक समुदाय का 'अपमान': सीएसजेएमयू कुलपति

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  • Publish Date - July 31, 2026 / 08:31 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 08:31 PM IST

कानपुर (उप्र), 31 जुलाई (भाषा) छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाद्रा की आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि के बारे में टिप्पणी को देश के वैज्ञानिक और अकादमिक समुदाय का ‘अपमान’ करार दिया है।

प्रोफेसर पाठक ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों को राजनीतिक बहसों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि वे किसी राजनीतिक विचारधारा के बजाय समाज और ज्ञान को आगे बढ़ाने के लिए काम करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘मैं भी शोधार्थी रहा हूं। जन-प्रतिनिधियों को वैज्ञानिकों के बारे में ऐसी टिप्पणियां करने से बचना चाहिए।’

प्रियंका गांधी की कामकोटि के बारे में ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’’ टिप्पणी पर पाठक ने कहा कि इस बयान से देश भर के वैज्ञानिकों और शिक्षकों की भावनाएं आहत हुई हैं। पाठक ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा में विद्वानों को हमेशा सर्वोच्च सम्मान दिया गया है और वैज्ञानिकों को उनके अकादमिक योगदान के आधार पर आंका जाना चाहिए, न कि राजनीतिक नजरिए से।

कुलपति ने कहा कि उन्होंने प्रियंका गांधी को पत्र लिखकर उनसे अपनी टिप्पणी वापस लेने और वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों पर टिप्पणी करते समय संयम बरतने का आग्रह किया है। पाठक ने राजनीतिक दलों से भी ऐसे बयानों की निंदा करने की अपील करते हुए कहा कि वैज्ञानिकों और शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनाए रखी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘वैज्ञानिक और शिक्षाविद देश की ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने और नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए जिम्मेदार हैं। उनकी विश्वसनीयता को कम करने वाली टिप्पणियां शिक्षा और वैज्ञानिक सोच के लिए नुकसानदेह हैं।’’

पद्म पुरस्कार से सम्मानित कामकोटि नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार की ओर से गठित छह-सदस्यीय परीक्षा सुधार कार्यबल के सदस्य हैं।

कामकोटि जनवरी 2025 में चेन्नई स्थित एक गौशाला में पोंगल समारोह के दौरान दिए गए अपने भाषण को लेकर विवादों में आ गए थे। अपने संबोधन में उन्होंने एक संन्यासी की कहानी सुनाई थी, जिसके बारे में उनका दावा था कि गौ मूत्र पीने के बाद वह तेज बुखार से ठीक हो गया था। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद कई वैज्ञानिकों, नेताओं और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसकी आलोचना की थी।

भाषा सं आनन्द आशीष

आशीष