दिल्ली की एक अदालत ने 2019 के तेजाब हमला मामले में चार आरोपियों को बरी किया

दिल्ली की एक अदालत ने 2019 के तेजाब हमला मामले में चार आरोपियों को बरी किया

दिल्ली की एक अदालत ने 2019 के तेजाब हमला मामले में चार आरोपियों को बरी किया
Modified Date: September 29, 2026 / 04:31 pm IST
Published Date: September 29, 2026 4:31 pm IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने यहां संगम विहार में एक महिला पर तेजाब फेंकने के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज करने में 15 माह की अकारण देरी समेत गंभीर खामियां नजर आने के बाद चार आरोपियों को बरी कर दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरगुरविंदर सिंह जग्गी महिला पर तेजाब फेंकने के आरोपियों –प्रीत पाल, रमेश, सुरेश चंद और बबलू कुमार– के खिलाफ मामले की सुनवाई कर रहे थे।

सत्र अदालत ने कहा, ‘‘यह अदालत मानती है कि अभियोजन पक्ष किसी भी आरोपी के विरुद्ध लगे आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। जांच में गंभीर खामियों तथा (प्राथमिकी दर्ज करने में) देरी का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण न दिए जाने और बचाव पक्ष के ऐसे अखंडनीय साक्ष्यों के मद्देनजर आरोपियों को व्यापक संदेह का लाभ मिलना ही चाहिए।’’

रेणु नामक महिला ने आरोप लगाया था कि नौ जुलाई, 2019 को संगम विहार में एक मंदिर के पास आरोपी दो मोटरसाइकिल पर आए और उन्होंने उसपर रसायन फेंका। उसकी पीठ और कमर पर रसायन गिरने से जलने के निशान पड़ गए।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपियों ने रेणु पर हमला किया और बाद में उसे प्रीत पाल के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की धमकी दी।

हालांकि, अदालत ने कहा कि इस मामले में प्राथमिकी कथित घटना के लगभग 18 महीने बाद, सात जनवरी 2021 को दर्ज की गई थी। जांच अधिकारी ने भी माना कि उन्हें इस देरी की वजह नहीं पता थी।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला मुख्य रूप से रेणु की गवाही पर टिका था। जिरह के दौरान, लड़की ने बताया था कि पीठ पर जलन महसूस होने के बाद वह पीछे मुड़ी थी।

अदालत ने कहा कि इसका मतलब है कि उसने असल में यह नहीं देखा था कि उसपर द्रव किसने फेंका था। अदालत ने यह भी कहा कि बोतल पकड़े हुए व्यक्ति के तौर पर प्रीत पाल की उसकी पहचान घटना के बाद लगाई गई एक अटकल थी।

अदालत ने कहा, ‘‘रमेश, सुरेश या बबलू के खिलाफ कोई स्पष्ट हरकत साबित नहीं हुई है। इसी तरह, आईपीसी की धारा 195ए और 506 के तहत लगे आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती है और ये ‘बिना किसी उचित संदेह के साबित होने’ के पैमाने पर खरे नहीं उतरते हैं।’’

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष कथित अपराधों के लिए जरूरी बातें साबित करने में नाकाम रहा, इसलिए सभी चार आरोपियों को बरी किया जाता है।

अदालत ने कहा, ‘‘शक चाहे कितना भी मज़बूत क्यों न हो, वह सबूत की जगह नहीं ले सकता।’’

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश


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