जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने मंत्रियों और विधायकों के वेतन संशोधन संबंधी दो विधेयक वापस लिए

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने मंत्रियों और विधायकों के वेतन संशोधन संबंधी दो विधेयक वापस लिए

जम्मू-कश्मीर विधानसभा ने मंत्रियों और विधायकों के वेतन संशोधन संबंधी दो विधेयक वापस लिए
Modified Date: September 29, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: September 29, 2026 4:14 pm IST

श्रीनगर, 29 सितंबर (भाषा) मंत्रियों और विधायकों के वेतन में संशोधन संबंधी दो विधेयक जम्मू-कश्मीर विधानसभा द्वारा वापस लिये जाने के बीच मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि वह ‘‘वेतन में वृद्धि के पक्ष में नहीं थे’’।

जम्मू-कश्मीर मंत्री एवं राज्य मंत्री वेतन अधिनियम, 1956 तथा जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य वेतन एवं भत्ता अधिनियम, 1960 में संशोधन के लिए ये विधेयक मुख्यमंत्री द्वारा सोमवार को विधानसभा में पेश किए गए थे।

जब भाजपा विधायकों ने इन विधेयकों पर कुछ आपत्तियां जताईं, तो मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ये सर्वसम्मति से पारित नहीं होते हैं तो वह इन्हें वापस ले लेंगे।

भाजपा नेता शाम लाल शर्मा ने विधेयकों का विरोध करते हुए कहा कि सरकार को इसके बजाय दैनिक वेतनभोगियों और संविदा कर्मचारियों को राहत देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

इस पर अब्दुल्ला ने जवाब दिया, ‘‘अगर उनकी (भाजपा) मंशा दैनिक वेतनभोगियों की मदद करने की होती, तो (भाजपा विधायक सुरजीत सिंह) सलाथिया को रिपोर्ट में यह बात कहनी चाहिए थी। किसी भी भाजपा विधायक ने असहमति नोट नहीं लिखा। क्या किसी विधायक ने आपत्ति जताई? नहीं। अगर उनके मन में दैनिक वेतनभोगियों के प्रति इतनी ही सहानुभूति थी, तो उन्होंने 2024 से पहले उनकी मदद क्यों नहीं की?’’

मुख्यमंत्री मंत्रियों और विधायकों के वेतन वृद्धि की समीक्षा के लिए गठित समिति का जिक्र कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह वेतन बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे।

उन्होंने सदन से विधेयक वापस लेने की अपील करते हुए कहा, ‘‘मैंने अपने सहयोगियों से कहा था कि जब तक ये विधेयक सर्वसम्मति से पारित नहीं हो जाते, मैं इन पर जोर नहीं दूंगा।’’

विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयकों को मतदान के लिए रखा और उन्हें वापस ले लिया गया।

भाजपा सदस्यों ने विधेयक वापस लेने के पक्ष में मतदान नहीं किया, जिस पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के सदस्यों ने उनकी आलोचना की।

जम्मू-कश्मीर राज्य विधानमंडल सदस्य पेंशन अधिनियम, 1984 में संशोधन का एक विधेयक सदन में पेश किया गया जिसे ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।

हालांकि मुख्यमंत्री ने इस विधेयक को भी वापस लेने की बात की, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्यों ने कहा कि यह विधेयक पूर्व विधायकों से संबंधित है, इसलिए इसे वापस नहीं लिया जाना चाहिए।

विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मेरे घर में भी एक पेंशनभोगी हैं और हम सभी एक न एक दिन पेंशनभोगी होंगे।’’

भाषा खारी अविनाश

अविनाश


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