बंगाल की मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रपत्र छह आ रहे: अभिषेक

बंगाल की मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रपत्र छह आ रहे: अभिषेक

बंगाल की मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में प्रपत्र छह आ रहे: अभिषेक
Modified Date: March 30, 2026 / 10:07 pm IST
Published Date: March 30, 2026 10:07 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

कोलकाता, 30 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के प्रयासों का आरोप लगाते हुए सोमवार को अन्य राज्यों से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर प्रपत्र-छह आवेदन जमा किए जाने पर चिंता व्यक्त की और निर्वाचन आयोग (ईसी) से स्पष्टीकरण मांगा।

अभिषेक बनर्जी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘हम जो देख रहे हैं वह बेहद चिंताजनक है। इस बात के उत्तरोत्तर संकेत मिल रहे हैं कि बंगाल की जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करने के समन्वित प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके केंद्र में भाजपा है और निर्वाचन आयोग आंखें मूंदे हुए है।’’

तृणमूल महासचिव ने शाम को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज अग्रवाल से मुलाकात कर इस मुद्दे पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके मताधिकार का क्या हो रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के मूल सिद्धांतों से जुड़ा हुआ बताया।

उन्होंने दावा किया कि पार्टी को कई जिलों से प्रपत्र-छह के आवेदनों में अचानक वृद्धि की विश्वसनीय रिपोर्ट मिल रही हैं।

प्रपत्र-छह का उपयोग मतदाता सूची में नये मतदाताओं को शामिल करने के लिए किया जाता है।

अभिषेक बनर्जी ने कहा, “ये सामान्य प्रविष्टियां नहीं हैं। गंभीर चिंताएं हैं कि इनमें से कई प्रविष्टियां उन व्यक्तियों से जुड़ी हो सकती हैं, जिनका बंगाल से कोई वास्तविक संबंध नहीं है, जो यहां नहीं रहते, यहां काम नहीं करते और राज्य में उनका कोई हित नहीं है।”

एक कथित वीडियो क्लिप का जिक्र करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यह “इन चिंताओं को और बढ़ा देता है”।

‘पीटीआई-भाषा’ इस वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर पायी है, जिसमें कथित तौर पर जिलों में निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को कुछ कागजात सौंपे जा रहे हैं।

तृणमूल महासचिव ने कहा, ‘‘ऐसा प्रतीत होता है कि हजारों ऐसे प्रपत्रों का ढेर लगाया जा रहा है, जिससे इस प्रक्रिया के पैमाने और उद्देश्य के बारे में गंभीर सवाल उठते हैं।’’

उन्होंने निर्वाचन आयोग से जवाबदेही की मांग करते हुए कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग को जवाब देना होगा।’’

भाषा

राजकुमार सुरेश

सुरेश


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