‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की बढ़ती लोकप्रियता से अभिजीत दीपके में माता-पिता चिंतित
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की बढ़ती लोकप्रियता से अभिजीत दीपके में माता-पिता चिंतित
छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र), 22 मई (भाषा) व्यंग्यात्मक डिजिटल मुहिम ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय होने के मद्देनजर इसके संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता को यह डर सताने लगा है कि उनका बेटा मुसीबत में पड़ सकता है या उसे गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
सीजेपी को एक सप्ताह पहले ही बोस्टन विश्वविद्यालय के छात्र अभिजीत ने शुरू किया था। इंस्टाग्राम पर इस संगठन के अब तक एक करोड़ 90 लाख से अधिक ‘फॉलोअर’ हैं। दीपके पहले ‘आम आदमी पार्टी’ (आप) से जुड़े रहे थे।
छत्रपति संभाजीनगर में रहने वाले दीपके के माता-पिता भगवान और अनीता दीपके ने बृहस्पतिवार को एक मराठी समाचार चैनल से कहा कि वे नहीं चाहते कि उनका बेटा राजनीति में कदम रखे।
दीपके के अनुसार, सीजेपी भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की इस टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई जिसमें उन्होंने वरिष्ठता की मांग कर रहे एक वकील से नाराजगी जताते हुए ‘‘परजीवी’’ और ‘‘कॉकरोच’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
प्रधान न्यायाधीश ने बाद में स्पष्टीकरण दिया था कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनकी टिप्पणी विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित थी जो ‘‘फर्जी डिग्रियों’’ के माध्यम से वकालत के पेशे में प्रवेश करते हैं।
अभिजीत के पिता भगवान ने कहा, ‘‘आजकल की राजनीति को देखें तो डरना स्वाभाविक है, चाहे उसके कितने भी समर्थक हों। अपने एक साक्षात्कार में उसने स्वयं भारत लौटने पर गिरफ्तारी का डर जताया था। हम अखबारों में ऐसी घटनाओं के बारे में पढ़ते हैं।’’
अभिजीत की मां अनीता ने कहा कि वह चाहती हैं कि उनका बेटा राजनीति से दूर रहे और नौकरी पाने पर ध्यान दे।
उन्होंने बताया कि अभिजीत ने पहले छत्रपति संभाजीनगर में पढ़ाई की और बाद में आगे की पढ़ाई के लिए पुणे चला गया। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग उसके लिए मुश्किल थी, इसलिए उसने मीडिया क्षेत्र में आने का फैसला किया।
भगवान और अनीता ने बताया कि उन्हें सीजेपी के बारे में सबसे पहले एक पड़ोसी से पता चला।
भगवान ने कहा कि सोशल मीडिया पर सीजेपी के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें चिंतित कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं चिंतित हूं क्योंकि वह अब मशहूर हो गया है और ऐसे लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाता है। मैं यह सोचकर पिछले दो रातों से सो नहीं पाया हूं कि उसके साथ क्या हो सकता है। मुझे राजनीति से नफरत है और इसमें मेरी कोई रुचि नहीं है।’’
भाषा
प्रचेता सिम्मी
सिम्मी

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