नीट की दोबारा परीक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम: स्वास्थ्य, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दिया आश्वासन

नीट की दोबारा परीक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम: स्वास्थ्य, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दिया आश्वासन

नीट की दोबारा परीक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम: स्वास्थ्य, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने दिया आश्वासन
Modified Date: June 10, 2026 / 09:51 pm IST
Published Date: June 10, 2026 9:51 pm IST

नयी दिल्ली, 10 जून (भाषा) स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को एक संसदीय समिति को आश्वस्त किया कि 21 जून को नीट-यूजी पुनर्परीक्षा निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

तीन मई को आयोजित स्नातक चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को प्रश्नपत्र लीक होने के आरोपों के चलते 12 मई को रद्द कर दिया गया। इसके बाद, नीट पुनर्परीक्षा कराने के मामले पर स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मामलों की संसदीय समिति ने दोनों मंत्रालयों के सचिवों को तलब किया था।

समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) के शीर्ष अधिकारियों को भी तलब किया था।

समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से प्रवेश परीक्षाओं को निष्पक्ष, पारदर्शी और गड़बड़ी-मुक्त बनाने के लिए पूरी तरह भरोसेमंद एवं त्रुटिरहित व्यवस्था अपनाने को कहा।

समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से कहा कि चीन, अमेरिका और अन्य देशों में भी इसी प्रकार की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, लेकिन वहां प्रश्नपत्र लीक होने या अन्य अनियमितताओं की घटनाएं सामने नहीं आतीं।

सदस्यों ने अधिकारियों को दूसरे देशों के सर्वोत्तम तौर तरीकों और प्रक्रियाओं से सीख लेने तथा उन्हें अपनाने की सलाह दी, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाया जा सके।

समिति ने परीक्षा एजेंसी का हौसला बढ़ाने के साथ एनएमसी और एनटीए के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। सदस्यों ने छात्रों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई और साथ ही पेपर लीक व परीक्षा रद्द होने की वजह से उम्मीदवारों में बढ़ती घबराहट का भी ज़िक्र किया।

अधिकारियों ने समिति के सदस्यों को आश्वस्त किया कि 21 जून को नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा के लिए पूरी तरह सुरक्षित, पारदर्शी और त्रुटिरहित व्यवस्थाएं की गई हैं।

नीट-यूजी प्रश्नपत्र विवाद के बाद यह तीसरी संसदीय समिति थी, जिसके समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रालयों, एनटीए तथा एनएमसी के शीर्ष अधिकारियों ने पेश होकर अपना पक्ष रखा।

भाषा आशीष सुभाष

सुभाष


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