कोलकाता, 28 जुलाई (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हावड़ा में बुधवार को होने वाले अंतरधार्मिक विवाह के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने और विवाह निर्विघ्न संपन्न कराया जाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि ‘‘इस देश के वयस्क नागरिकों को अपने जीवनसाथी का चयन करने का अधिकार है’’।
अदालत ने यह टिप्पणी अलग-अलग धर्मों के एक युवक और एक युवती की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की, जिसमें उन्होंने विवाह संपन्न कराने के लिए पुलिस सुरक्षा दिये जाने का अनुरोध किया था।
उनके वकील ने दावा किया कि विवाह के फैसले का स्थानीय लोगों द्वारा विरोध किए जाने के कारण उन्हें सुरक्षा संबंधी आशंका है।
हावड़ा (ग्रामीण) के पुलिस अधीक्षक अमित वर्मा ने मंगलवार को कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने सोमवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को निर्देश दिया कि बुधवार को होने वाले विवाह के दौरान याचिकाकर्ताओं को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘यदि मामला अंतरधार्मिक विवाह का भी है, तब भी इस अदालत को इसमें कोई बाधा नहीं दिखती, क्योंकि याचिकाकर्ता इस देश के वयस्क नागरिक हैं और उन्हें अपने जीवनसाथी का चयन करने का अधिकार है।’’
अदालत ने पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि विवाह के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने हावड़ा के उलूबेरिया थाने के प्रभारी निरीक्षक को विवाह संपन्न होने के सात दिन के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि विवाह के फैसले को लेकर इलाके में विरोध का माहौल बन गया है, जिसके कारण युवक और युवती को आशंका है कि उन्हें विवाह करने से रोका जा सकता है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत में उलूबेरिया थाने के प्रभारी निरीक्षक की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि इलाके में शांति बनाए रखने के लिए प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाए हैं।
भाषा अमित देवेंद्र
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