कोलकाता, छह जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता नगर निगम (केएमसी) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके बोर्ड को भंग क्यों न कर दिया जाए।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम के महापौर पद से इस्तीफे के बाद शहर के नागरिक प्रशासन में उत्पन्न ताज़ा अनिश्चितता के बीच राज्य सरकार ने इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
शहरी विकास एवं नगर निगम विभाग ने कोलकाता नगर निगम अधिनियम, 1980 के प्रावधानों के तहत निगम को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
हकीम ने शुक्रवार को महापौर पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके 24 घंटे से भी कम समय के भीतर यह कदम उठाया गया।
हकीम ने कहा था कि वह अब प्रभावी ढंग से कार्य करने की स्थिति में नहीं हैं और बिना अधिकार के केवल कुर्सी पर बैठे रहना नहीं चाहते।
भाजपा सरकार ने नोटिस में कहा कि नगर निगम कोलकाता के निवासियों के प्रति अपने दायित्वों को निभाने में विफल रहा और महापौर के इस्तीफे से निगम के सामान्य कामकाज व नागरिक सेवाओं के वितरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अधिकारियों ने बताया कि नोटिस की प्रतियां नगर आयुक्त, नगर सचिव और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई हैं।
सरकार ने केएमसी अधिनियम की धारा 117 का हवाला दिया, जो प्रदेश सरकार को नगर निगम द्वारा वैधानिक कर्तव्यों का पालन न करने, लगातार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में चूकने या अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने की स्थिति में कार्रवाई करने का अधिकार देती है।
नोटिस के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों के मद्देनजर सरकार को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि क्या निगम अपने संवैधानिक और वैधानिक दायित्वों को पूरा करने में सक्षम है।
नोटिस में बताया गया कि कोई भी निर्णय लेने से पहले, कानून के अनुसार नगर निकाय को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है इसलिए निगम को तीन दिनों के भीतर लिखित जवाब प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
भाषा जितेंद्र पवनेश
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