ओडिशा में आपदा प्रबंधन प्रणाली को डेटा और तकनीक आधारित बनाने के लिए समझौते किये गये

ओडिशा में आपदा प्रबंधन प्रणाली को डेटा और तकनीक आधारित बनाने के लिए समझौते किये गये

ओडिशा में आपदा प्रबंधन प्रणाली को डेटा और तकनीक आधारित बनाने के लिए समझौते किये गये
Modified Date: September 2, 2026 / 10:17 pm IST
Published Date: September 2, 2026 10:17 pm IST

भुवनेश्वर, दो सितंबर (भाषा) ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और ‘सिविकडेटालैब’ के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, ताकि आपदा प्रबंधन प्रणाली को अधिक डेटा आधारित, वैज्ञानिक और तकनीक समर्थित ढांचे में विकसित किया जा सके। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि कहा कि इन दोनों साझेदारियों से जमीनी स्तर पर आपदा जोखिम आकलन, तैयारियों और निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा इससे आपदा के प्रति अधिक सक्षम और सुरक्षित राज्य बनाने की दिशा में ओडिशा के प्रयासों को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा।

इन एमओयू पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी, यूएनडीपी इंडिया की रेजिडेंट प्रतिनिधि एंजेला लुसिगी और ‘सिविकडेटालैब’ के निदेशक एवं सह-संस्थापक गौरव गोडवानी की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।

इस अवसर पर पुजारी ने कहा कि आज आपदा प्रबंधन को केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि सटीक और समय पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर पहले से तैयारी, जोखिम आकलन और संभावित कार्रवाई पर ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘डेटा आधारित निर्णय लेना लोगों की जान बचाने और संपत्ति की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे अधिक प्रभावी और व्यापक विकास योजनाएं बनाने में भी मदद मिलती है।’’

मंत्री ने कहा कि ये नयी साझेदारियां आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ओडिशा की स्थिति को और मजबूत करेंगी।

उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन, सामुदायिक लचीलापन, तैयारियों और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में यूएनडीपी का व्यापक राष्ट्रीय और वैश्विक अनुभव ओडिशा की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत करने में उपयोगी साबित होगा।

बयान के अनुसार सिविकडेटालैब के साथ किए गए गैर-वित्तीय समझौते से ओडिशा में आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए एक समर्पित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) विकसित करने में मदद मिलेगी।

भाषा रवि कांत रवि कांत राजकुमार

राजकुमार


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