चुनाव से पहले अभिषेक ने नंदीग्राम में स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के जरिए शुभेंदु को चुनौती दी

चुनाव से पहले अभिषेक ने नंदीग्राम में स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के जरिए शुभेंदु को चुनौती दी

चुनाव से पहले अभिषेक ने नंदीग्राम में स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के जरिए शुभेंदु को चुनौती दी
Modified Date: January 16, 2026 / 10:18 am IST
Published Date: January 16, 2026 10:18 am IST

नंदीग्राम, 16 जनवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में अब कुछ ही महीने शेष रहने के बीच तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने नंदीग्राम में राजनीतिक दांव खेलते हुए घोषणा की कि निर्वाचन क्षेत्र में हर साल ‘सेवाश्रय’ स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे और इसी के साथ उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता शुभेंदु अधिकारी को उनके ‘गढ़’ में सीधी चुनौती दी।

इस साल ये शिविर 30 जनवरी तक आयोजित किए जाएंगे। ये बनर्जी के डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र में होने वाले व्यापक ‘सेवाश्रय’ अभियानों की तुलना में छोटे हैं, लेकिन फिर भी इनमें काफी लागत लगेगी।

बनर्जी ने बृहस्पतिवार को निर्वाचन क्षेत्र के दो ब्लॉक में लगे शिविरों का दौरा करने के बाद कहा, ‘‘नंदीग्राम में हर साल सेवाश्रय लगेगा। सिर्फ अगले साल नहीं, हर साल। इस बार दो मॉडल शिविर लगाए गए हैं। भविष्य में सभी 17 क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। अगर किसी में ताकत है, तो वे इसे रोककर दिखा दें।’’

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राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि यह घोषणा स्वास्थ्य सेवा के बारे में कम और उस सीट पर राजनीतिक आधार को पुनः प्राप्त करने के लिए अधिक थी जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सत्ता में आने से लेकर उनकी सबसे बड़ी व्यक्तिगत चुनावी हार तक जैसे बंगाल के चुनावी वृत्तांतों को परिभाषित करने के लिए जानी जाती है।

पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम विधानसभा सीट जितनी बहुआयामी राजनीतिक महत्ता रखने वाली कुछ ही सीट हैं।

यहां 2007 के भूमि आंदोलन ने ममता बनर्जी को एक जुझारू विपक्षी नेता से जनसमुदाय की प्रतीक के रूप में बदल दिया और अंततः वाम मोर्चे के 34 साल के शासन का अंत कर दिया। इसी सीट से चौदह वर्ष बाद 2021 के विधानसभा चुनावों में वह अपने पूर्व सहयोगी शुभेंदु अधिकारी से हार गईं।

इस साल चुनाव प्रचार के जोर पकड़ने के साथ तृणमूल द्वारा नंदीग्राम पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया जाना एक ऐसे निर्वाचन क्षेत्र की छवि को फिर से परिभाषित करने का प्रयास है जिसे भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी वैचारिक पैठ के प्रमाण के रूप में पेश करती है।

तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव बनर्जी ने तीखा तंज सकते हुए यहां तक संकेत दिया कि अधिकारी के परिवार के सदस्यों को भी एक दिन ‘सेवाश्रय’ सेवाओं का लाभ लेना पड़ सकता है।

बनर्जी ने इन शिविरों के इस समय आयोजन का कारण राजनीतिक होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पहल पार्टी की ‘एक डाके अभिषेक’ हेल्पलाइन के माध्यम से निवासियों द्वारा बार-बार किए गए अनुरोधों के बाद शुरू की गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर यह राजनीतिक होता तो हम जिन 77 सीट पर हारे, उन सब में शिविर लगाते। नंदीग्राम के लोगों ने हमसे संपर्क किया और हमने उनकी मांग पूरी की।’’

अधिकारी ने शिविर संचालित करने के लिए धन के स्रोत पर सवाल उठाया था जिस पर बनर्जी ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, ‘‘वह हिसाब मांगने वाले कौन होते हैं? जरूरत पड़ी तो हम आयकर विभाग या किसी भी वैधानिक प्राधिकरण को विवरण दे देंगे।’’

उन्होंने कहा कि ‘अधिकारी’ उपनाम होने से कोई विशेष अधिकार नहीं मिल जाता।

भाजपा नेता ने पलटवार करते हुए ‘सेवाश्रय’ पहल को दिखावटी करार दिया और तृणमूल पर आरोप लगाया कि उसने नंदीग्राम को केवल भारी पुलिस सुरक्षा के बीच ‘‘पैरासिटामोल और ओआरएस’’ वितरित करने के लिए चुना है।

उन्होंने कहा, ‘‘नंदीग्राम के लोग इतने तुच्छ नहीं हैं कि वे पैरासिटामोल लेने के लिए अवरोधक पार कर लें।’’

उन्होंने कहा कि स्थानीय निवासियों को पता है कि साल भर उनके साथ कौन खड़ा रहता है।

भाषा सिम्मी वैभव

वैभव


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