अहमदाबाद धमाके:अदालत ने दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी, कहा- आतंक फैलाने की मंशा बेहद भयावह थी

अहमदाबाद धमाके:अदालत ने दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी, कहा- आतंक फैलाने की मंशा बेहद भयावह थी

अहमदाबाद धमाके:अदालत ने दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी, कहा- आतंक फैलाने की मंशा बेहद भयावह थी
Modified Date: July 14, 2026 / 08:55 am IST
Published Date: July 14, 2026 8:55 am IST

अहमदाबाद, 14 जुलाई (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने वर्ष 2008 के अहमदाबाद सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में प्रतिबंधित आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) के 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि इस अपराध की ‘व्यापक और भयावह साजिश’, समाज में आतंक फैलाने की मंशा तथा बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों की मौत जैसे कारक मृत्युदंड को उचित ठहराते हैं।

न्यायमूर्ति ए.वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति समीर दवे की खंडपीठ ने सात जुलाई को दिए अपने फैसले में 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा भी बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि गुजरात और केरल में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में उनकी भूमिका तथा रसद और अन्य मदद उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका साबित हुई है। इस निर्णय की प्रति सोमवार को उपलब्ध हो सकी।

अहमदाबाद में 26 जुलाई 2008 को विभिन्न इलाकों में मात्र 70 मिनट के भीतर 21 सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। विस्फोट उन अस्पतालों में भी किए गए थे, जहां घायलों को उपचार के लिए ले जाया जा रहा था। भारत में किसी आतंकी हमले के दौरान अस्पतालों को निशाना बनाए जाने की यह पहली घटना थी।

उच्च न्यायालय ने सभी दोषियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए फरवरी 2022 में विशेष अदालत द्वारा दिए गए फैसले पर मुहर लगाई। विशेष अदालत ने इंडियन मुजाहिदीन के 38 सदस्यों को मृत्युदंड और 11 अन्य को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उच्च न्यायालय ने सात जुलाई के अपने फैसले में कहा कि 38 दोषियों का आपराधिक इतिहास और इस आतंकी हमले में उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से साबित करती है कि उन्होंने ऐसा आतंकवादी कृत्य किया, जिसके लिए मृत्युदंड उचित है।

उच्च न्यायालय ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत, सुनियोजित साजिश, समाज में व्यापक आतंक का माहौल पैदा करने की मंशा, मुकदमे के दौरान दोषियों का आचरण, साजिश का व्यापक स्वरूप तथा इस अमानवीय और जघन्य कृत्य में निर्दोष लोगों की जान जाने जैसे सभी पहलू मृत्युदंड को उचित ठहराते हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘ जिस तरीके से बम विस्फोटों को अंजाम दिया गया, वह दोषियों की मानसिकता और निर्दोष लोगों की जान लेने के उनकी निर्ममता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।’’

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि कुछ दोषियों का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से रहा है और किसी ने भी अपने कृत्य पर कोई पछतावा व्यक्त नहीं किया। जेल में रहने के दौरान भी उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई थी। ऐसे में उन्हें सजा में कोई राहत देने का कोई आधार नहीं है।

शेष 11 दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि उन्होंने आतंकवादी प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया तथा साजिश के लिए स्कूटर, प्लास्टिक के कंटेनर और घड़ियों की व्यवस्था की। इसके अलावा उन्होंने अन्य आरोपियों को ठहराने के लिए सुरक्षित ठिकानों की भी व्यवस्था की थी।

भाषा शोभना

शोभना


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