अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने विमान हादसे में मारे गए 260 लोगों को श्रद्धांजलि दी

अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने विमान हादसे में मारे गए 260 लोगों को श्रद्धांजलि दी

अहमदाबाद सिविल अस्पताल ने विमान हादसे में मारे गए 260 लोगों को श्रद्धांजलि दी
Modified Date: June 12, 2026 / 04:00 pm IST
Published Date: June 12, 2026 4:00 pm IST

अहमदाबाद, 12 जून (भाषा) एअर इंडिया विमान हादसे में मारे गए 260 लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए इस घटना की पहली बरसी पर अहमदाबाद सिविल अस्पताल में शुक्रवार को एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें मृतकों की याद में पौधारोपण करने का संकल्प लिया गया।

पिछले साल 12 जून को, एअर इंडिया का विमान (उड़ान संख्या एआई-171) सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद मेघानीनगर इलाके में बी. जे. मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर में गिर गया था।

इस हादसे में, विमान में सवार 241 लोगों और जमीन पर मौजूद 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया।

अहमदाबाद सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक राकेश जोशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने एक प्रार्थना सभा आयोजित की, जिसमें पिछले साल हुए हादसे में जान गंवाने वाले 260 लोगों को श्रद्धांजलि के तौर पर 260 पौधे लगाने और उनकी देखरेख करने की शपथ ली गई।’’

यह प्रार्थना सभा सिविल अस्पताल से जुड़े बी.जे. मेडिकल कॉलेज के सभागार में आयोजित की गई।

जोशी ने बताया कि सिविल अस्पताल परिसर में रक्तदान शिविर भी लगाया गया है।

हादसे के बाद, 70 घायलों को सिविल अस्पताल लाया गया था। इसके अलावा, घटना में जान गंवाने वाले लोगों के शव भी लाये गए थे। अधिकतर शव बुरी तरह झुलस जाने के कारण उनकी पहचान करना मुश्किल था, इसलिए फोरेंसिक टीमों और स्थानीय प्रशासन ने शव की पहचान के लिए परिसर में डीएनए मिलान की कवायद शुरू की।

जमीन पर जान गंवाने वाले लोगों में 14 साल का आकाश पटनी भी शामिल था। जब यह हादसा हुआ, उस वक्त वह मेघानीनगर में बी.जे. मेडिकल कॉलेज छात्रावास के पास परिवार की छोटी सी चाय दुकान पर अपनी मां को दोपहर का भोजन देने गया था।

आकाश के पिता सुरेशभाई पटनी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने अपने बेटे आकाश और विमान हादसे में मारे गए सभी लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए शाम 6 बजे ‘सुंदरकांड’ और ‘हनुमान चालीसा’ पाठ का आयोजन किया है।’’

आकाश की मां सीताबेन के शरीर पर जलने के हैं। वह आकाश की फूलों से सजी तस्वीर के पास बैठी थीं। वह अपने बेटे को याद कर रही थीं और उनकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

भाषा सुभाष संतोष

संतोष


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