Tajinder Pal Singh Bagga News : “सिख विरोधी भगवंत मान के नोटिस से नहीं डरता!” लीगल नोटिस मिलने पर भड़के तजिंदर बग्गा, पंजाब सीएम को दी खुली चुनौती
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस पर बीजेपी नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बग्गा ने कहा कि वह किसी कानूनी नोटिस या फर्जी FIR से डरने वाले नहीं हैं और बिना किसी भय के सच बोलते रहेंगे।
Tajinder Pal Singh Bagga News / Image Source ; X
नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच एक बार फिर सोशल मीडिया पर जुबानी जंग तेज हो गई है। मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा एक वीडियो को लेकर भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब देते हुए तजिंदर बग्गा ने उन्हें खुली चुनौती दी है। बग्गा ने सीएम मान पर ‘सिख विरोधी’ होने का आरोप लगाते हुए साफ कहा कि वह आम आदमी पार्टी की सरकार की डराने-धमकाने वाली राजनीति के आगे झुकने वाले नहीं हैं।
“फर्जी एफआईआर (FIR) से बिल्कुल नहीं डरता”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट करते हुए तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने मुख्यमंत्री कार्यालय की इस कानूनी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया। बग्गा ने लिखा, “सिख विरोधी भगवंत मान ने मुझे इस वीडियो को लेकर एक कानूनी नोटिस भेजा है। मैं यह पूरी तरह साफ कर देना चाहता हूं कि मैं आपके कानूनी नोटिस या फर्जी एफआईआर (FIR) से बिल्कुल नहीं डरता। मेरा विश्वास और आस्था केवल ‘श्री अकाल तख्त साहिब’ में है, आपकी डराने-धमकाने की तरकीबों में नहीं। मैं बिना किसी डर के लगातार सच बोलता रहूंगा।”
Anti-Sikh @BhagwantMann has sent me a legal notice over this video.
Let me make it clear, I am not afraid of your legal notices or fake FIRs. My faith lies in Shri Akal Takht Sahib, not in your intimidation tactics. I will continue to speak the truth without fear. pic.twitter.com/HaKwrEBimz
— Tajinder Bagga (@TajinderBagga) June 19, 2026
पहले भी दर्ज हो चुके है मामले
गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब तजिंदर बग्गा और पंजाब सरकार के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला हो। इससे पहले भी सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों को लेकर बग्गा के खिलाफ पंजाब में मामले दर्ज हो चुके हैं। बग्गा के इस नए पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं, और बीजेपी समर्थक इसे राज्य सरकार द्वारा अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का प्रयास बता रहे हैं।
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