अकाल तख्त जत्थेदार, एसजीपीसी प्रमुख ने पटियाला जेल में राजोआना से मुलाकात की
अकाल तख्त जत्थेदार, एसजीपीसी प्रमुख ने पटियाला जेल में राजोआना से मुलाकात की
पटियाला, 29 सितंबर (भाषा) अकाल तख्त के जत्थेदार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रमुख ने मंगलवार को पटियाला सेंट्रल जेल में बलवंत सिंह राजोआना से मुलाकात की, जिसे 1995 में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हुई हत्या के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी।
इस मौके पर अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज और एसजीपीसी प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी के अलावा तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी टेक सिंह और एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह गढ़ी भी मौजूद थे।
मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए गड़गज ने कहा कि अगर सरकार राजोआना के मामले में समय पर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो ‘पंज सिंह साहिबान’ की बैठक बुलाई जाएगी, ताकि राजोआना की भावनाओं के मुताबिक आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ़ हो सके।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय से निर्णय लेने के लिए समय मिलने के बावजूद, केंद्र ने पिछले छह वर्षों में राजोआना के मामले में कोई फ़ैसला नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि 2019 से इस मामले में शीर्ष अदालत में 41 तारीखें तय की गई हैं, लेकिन केंद्र ने कोई फैसला नहीं किया है।
गड़गज के अनुसार, राजोआना अपने मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने की अपील नहीं कर रहा है, बल्कि सरकार को उसके लंबे समय से लंबित मामले का समाधान करना चाहिए।
गड़गज ने बताया कि राजोआना का हौसला बुलंद था और वह पूरी तरह गुरु के प्रति समर्पित था।
उन्होंने यह भी कहा कि राजोआना ने साफ़ कर दिया था कि वह झुकेगा नहीं और ‘शहादत को गले लगाने’ के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि सिख इतिहास और परंपरा में दर्ज है कि उन्होंने शहादत तो स्वीकार की, लेकिन अपनी जान बचाने के बदले कभी भी शासकों के सामने घुटने नहीं टेके। उन्होंने कहा कि राजोआना भी इसी सिख परंपरा का पालन कर रहा है।
गड़गज ने कहा कि केंद्र सरकार ने राजोआना के मामले में श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के मौके पर 2019 में जारी अपनी ही अधिसूचना को लागू नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि राजोआना ने जगतार सिंह हवारा के मौलिक अधिकारों को लेकर भी चिंता जताई, जिसे अपनी बुजुर्ग और बीमार मां से मिलने के लिए पैरोल तक नहीं दी जा रही है। हवारा 1995 की हत्या के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा है।
अकाल तख्त के जत्थेदार ने कहा कि सरकारों का ऐसा बर्ताव सिखों के साथ घोर अन्याय है।
‘बंदी सिखों’ (सिख कैदियों) की रिहाई के लिए दो अक्टूबर को होने वाले मार्च के बारे में पूछे जाने पर गड़गज ने कहा कि जिस तरह एसजीपीसी ने ‘कौमी इंसाफ़ मोर्चा’ का समर्थन किया था, उसी तरह अकाल तख्त साहिब ने भी इसका पूरा समर्थन किया।
राजोआना ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर आग्रह किया था कि केंद्र सरकार उनकी दया याचिका पर तुरंत कोई फ़ैसला करे, जो पिछले 15 वर्षों से लंबित है।
अपने पत्र में राजोआना ने कहा था कि वह पिछले 31 वर्षों से जेल में है और पिछले 20 साल उसने अपने मामले में अंतिम फैसले का इंतज़ार करते हुए मौत की सज़ा के साये में बिताए हैं।
चंडीगढ़ में सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर 31 अगस्त 1995 को हुए एक धमाके में पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोग मारे गए थे। एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मौत की सज़ा सुनाई थी।
मार्च 2012 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने राजोआना की ओर से संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत दया याचिका दायर की थी।
भाषा राजकुमार दिलीप
दिलीप

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