जाल से मछली पकड़ने पर नए प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु से जवाब मांगा
जाल से मछली पकड़ने पर नए प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु से जवाब मांगा
नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को तमिलनाडु सरकार से ‘पर्स सीन’ जाल से मछली पकड़ने पर नए सिरे से प्रतिबंध लगाने के आरोप वाली याचिका पर जवाब तलब करते हुए कहा कि अदालत के आदेश का अतिलंघन नहीं किया जा सकता।
‘पर्स सीन’ मछली पकड़ने की एक विधि है, जिसमें नाव से जुड़े लंबवत जाल के जरिये समुद्र में मछलियों को चारों ओर से घेरा जाता है।
न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि न्यायालय के निर्देश का पालन करने के बजाय राज्य सरकार ने इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
पीठ ने तमिलनाडु सरकार के वकील से कहा, ‘‘हमने आदेश देखा है। यह प्रजनन मौसम के दौरान का आदेश नहीं है जो एक निश्चित अवधि में मछली पकड़ने पर रोक लगाता है। हम आपके सचिव को बुलाएंगे। हमारे आदेशों का अतिलंघन कैसे किया जा सकता है? दो सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करें।’’
तमिलनाडु के मछुआरों की ओर से पेश अधिवक्ता जया सुकिन ने कहा कि न्यायालय के दो सितंबर के आदेश के तुरंत बाद, जिसमें कुछ शर्तों के साथ पर्स सीन जाल से मछली पकड़ने की अनुमति दी गई थी, राज्य सरकार ने नौ सितंबर को अधिसूचना जारी कर इस तरह से मछली पकड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
मछुआरों की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने दो सितंबर के न्यायालय के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन किया है, जबकि राज्य के प्रतिनिधि और मत्स्य विभाग के निदेशक भी विशेषज्ञ समिति के सदस्य थे और उन्होंने पर्स सीन जाल से मछली पकड़ने संबंधी समिति की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार किया था।
भाषा संतोष मनीषा
मनीषा

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