नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने धन शोधन के दो मामलों में जेल में बंद अल-फलाह विश्वविद्यालय के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को छह सप्ताह की अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया है।
हालांकि, न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने सिद्दीकी को ‘कस्टडी पैरोल’ पर तीन अलग-अलग तारीख को अपनी पत्नी से मिलने की अनुमति दी है। उनकी पत्नी कैंसर से पीड़ित हैं।
सिद्दीकी ने यह बताते हुए अंतरिम जमानत का अनुरोध किया था कि उनकी पत्नी की हालत गंभीर है और वह उनके जीवन के इस मुश्किल समय में साथ रहना चाहते हैं।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि कोई आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हुई है। अदालत ने यह भी कहा कि उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार उनकी पत्नी की हालत बिगड़ने के बजाय सुधर रही है।
न्यायमूर्ति बनर्जी ने यह भी कहा कि सिद्दीकी के फरार होने, गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अदालत ने 13 जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘हालांकि, अदालत याचिकाकर्ता की पत्नी के स्वास्थ्य की स्थिति के प्रति सहानुभूति रखती है, लेकिन याचिकाकर्ता के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की गंभीरता और प्रकृति, मामले की वर्तमान कार्यवाही की स्थिति तथा उनके पद और प्रभाव को देखते हुए उसका स्पष्ट रूप से मानना है कि केवल मानवीय आधार पर जमानत प्रदान करने संबंधी वैधानिक प्रावधानों को शिथिल नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से उस वक्त, जब याचिकाकर्ता की तत्काल रिहाई को उचित ठहराने वाली कोई आपातकालीन या असाधारण परिस्थिति मौजूद नहीं है।’’
अदालत ने आदेश दिया, ‘‘यह अदालत इस समय याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, निष्पक्षता बनाए रखने और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए, यह अदालत याचिकाकर्ता को तीन दिन, यानी 21 जुलाई, 23 जुलाई और 25 जुलाई 2026 के लिए ‘कस्टडी पैरोल’ देना उचित समझती है।’’
यह देखते हुए कि सिद्दीकी एक ‘अत्यधिक जोखिम’ वाले विचाराधीन कैदी हैं, उच्च न्यायालय ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि वह ‘कस्टडी पैरोल’ के लिए सुरक्षा के उचित इंतजाम करें तथा उन्हें 21, 23 और 25 जुलाई को सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच तय पते पर अपनी बीमार पत्नी से भेंट सुनिश्चित की जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस दौरान उन्हें सिर्फ अपनी पत्नी से मिलने की इजाजत होगी, किसी और से नहीं।
‘कस्टडी पैरोल’ के तहत कैदी को सशस्त्र पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में मुलाकात स्थल तक ले जाया जाता है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अंतरिम जमानत याचिकाओं का विरोध किया था।
उन्हें 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में गिरफ़्तार किया गया था।
ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की दो प्राथमिकी पर आधारित है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि अल फलाह विश्वविद्यालय ने छात्रों और अभिभावकों को गुमराह करने के लिए ‘एनएएसी’ और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मान्यता प्राप्त होने के बारे में गलत जानकारी दी थी।
ईडी का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने 2018 से 2025 के बीच 415.10 करोड़ रुपये अर्जित किये और छात्रों से इकट्ठा किए गए धन का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए किया गया।
इसके बाद, दिल्ली में 45 करोड़ रुपये की जमीन को ‘‘धोखाधड़ी’’ से हासिल करने से जुड़े धन शोधन के एक नये मामले में ईडी ने सिद्दीकी को गिरफ़्तार कर लिया।
अल फलाह विश्वविद्यालय ‘सफेदपोश आतंकवाद’ की जांच के दायरे में आया था, जिसमें उससे जुड़े दो चिकित्सकों को गिरफ़्तार किया गया। वहीं, विश्वविद्यालय के अस्पताल से जुड़े एक और डॉक्टर, उमर-उन-नबी की पहचान 10 नवंबर 2025 को लाल किले के बाहर चलती कार में हुए बम विस्फोट के आत्मघाती हमलावर के तौर पर हुई। इस घटना में 15 लोगों की मौत हो गई थी।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश