कॉजपा की सभी मांगें पूरी; पांच सितंबर का मार्च वापस : दीपके

कॉजपा की सभी मांगें पूरी; पांच सितंबर का मार्च वापस : दीपके

कॉजपा की सभी मांगें पूरी; पांच सितंबर का मार्च वापस : दीपके
Modified Date: September 1, 2026 / 10:02 pm IST
Published Date: September 1, 2026 10:02 pm IST

छत्रपति संभाजीनगर, एक सितंबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा रद्द किये जाने और आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देने का केंद्र को निर्देश देने के बाद ‘‘पूर्ण न्याय’’ मिलने की घोषणा करते हुए पांच सितंबर को प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस लेने का मंगलवार को ऐलान किया।

कॉजपा संस्थापक अभिजीत दीपके ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में उच्चतम न्यायालय के निर्देश का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से उन सभी छात्रों और नागरिकों को अंतत: न्याय मिला है, जो अपनी आवाज उठाने के लिए सड़कों पर उतरे और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत के नेतृत्व वाली पीठ ने 20 से 25 जुलाई के बीच हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को मंगलवार को रद्द कर दिया और केंद्र को निर्देश दिया कि आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को तीन महीने के भीतर वित्तीय मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

इस कदम के बाद कॉजपा ने राष्ट्रीय राजधानी में प्रस्तावित अपना विरोध मार्च वापस ले लिया। कॉजपा ने पांच सितंबर, शिक्षक दिवस के दिन विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया था। कॉजपा ने आरोप लगाया था कि केंद्र ने 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा नहीं किया, जिनके जरिए परीक्षा में अनियमितताओं और नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ 36 दिनों से जारी आंदोलन को समाप्त करने के लिए कॉजपा को राजी किया गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘हम मार्च वापस ले रहे हैं क्योंकि हमारी सभी मांगें पूरी हो गई हैं। पूर्ण न्याय मिला है… इसमें हमें एक महीना लगा, लेकिन सही मायने में यह आंदोलन सफल रहा है।’’

उच्चतम न्यायालय का आभार जताते हुए दीपके ने इस फैसले का श्रेय लगातार समर्थन देने वाली जनता को दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह जीत केवल उन लोगों की नहीं है, जिन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया, बल्कि उन सभी लोगों की है, जो देशभर में इस आंदोलन से जुड़े। यह उन सभी लोगों की जीत है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी आवाज उठाई या व्हाट्सऐप पर स्टोरी लगाई। अगर आप सभी ने अपनी आवाज नहीं उठाई होती तो मुझे नहीं लगता कि यह संभव हो पाता।’’

उन्होंने कहा कि यह फैसला विस्तृत विचार-विमर्श के बाद आया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए पिछले दो दिनों में महाराष्ट्र में दिल्ली से आए प्रतिनिधिमंडलों के साथ 7-8 लंबी बैठकें हुईं।

पीड़ित परिवारों से माफी मांगते हुए दीपके ने युवाओं की मौत के लिए व्यवस्था और सरकार की नाकामी को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे पहले मैं आप सभी से माफी मांगना चाहता हूं। हम आपके बच्चों को बचा नहीं सके… इसमें उनकी कोई गलती नहीं थी। उन्होंने डॉक्टर बनने के लिए बहुत मेहनत की और ईमानदारी से पढ़ाई की थी। आपके बच्चों की जान सरकार की नाकामी के कारण गई।’’

उन्होंने प्रभावित परिवारों का उल्लेख करते हुए अभ्यर्थियों प्रतीक मेघवाल, आकांक्षा चतुर्वेदी, कहन पटेल और रिया थापा के परिवारों का उदाहरण दिया।

दीपके ने वित्तीय सहायता की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि कई प्रभावित परिवार गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रतीक के पिता मजदूर हैं। आकांक्षा के पिता बीमार हैं और कमाई नहीं कर सकते। मुआवजा उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकता और न ही उनके दुख को कम कर सकता है, लेकिन कम से कम इन परिवारों को अपनी आजीविका या छोटे बच्चों की पढ़ाई की चिंता नहीं करनी पड़ेगी।’’

उन्होंने सरकार से भविष्य में प्रश्नपत्र लीक और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की अपील की। दीपके ने कहा, ‘‘सरकार को यह जिम्मेदारी लेनी होगी कि आगे कोई भी छात्र परीक्षा या व्यवस्था की नाकामी के कारण आत्महत्या ना करे। अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।’’

कॉजपा के नेतृत्व में 20 जुलाई को दिल्ली में निकाले गए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया था।

छात्रों के नेतृत्व में हुए ये प्रदर्शन कई शहरों तक फैल गए थे। इनका मुख्य मुद्दा तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।

जंतर-मंतर पर 20 जून को शुरू हुआ आंदोलन 25 जुलाई को प्रधान के इस्तीफा देने और सरकार द्वारा कॉजपा की अन्य मांगें स्वीकार किए जाने के बाद समाप्त हुआ था।

भाषा अमित अविनाश

अविनाश


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