नेकां के दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन में राजग सहयोगियों को छोड़ सभी दलों को आमंत्रित किया जाएगा : उमर

नेकां के दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन में राजग सहयोगियों को छोड़ सभी दलों को आमंत्रित किया जाएगा : उमर

नेकां के दिल्ली में होने वाले विरोध प्रदर्शन में राजग सहयोगियों को छोड़ सभी दलों को आमंत्रित किया जाएगा : उमर
Modified Date: July 8, 2026 / 08:56 pm IST
Published Date: July 8, 2026 8:56 pm IST

श्रीनगर, आठ जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) केंद्र शासित प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की अपनी मांग को लेकर 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के लिए राजग घटकों को छोड़ सभी राजनीतिक दलों को आमंत्रित करेगी।

उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) में शामिल दलों के अलावा उन पार्टियों को भी निमंत्रण भेजा जाएगा जो न तो विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ हैं और न ही केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा हैं।

उमर अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘केवल ‘इंडिया’ गठबंधन ही नहीं बल्कि जंतर-मंतर (प्रदर्शन) के लिए तैयार निमंत्रण पत्र जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पार्टियों को भी भेजे जाएंगे। वे दल जो अभी विधानसभा में हैं और वे भी जो पहले रह चुकी हैं। नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला उन सभी को निमंत्रण भेजेंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी (आप), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), बीजू जनता दल (बीजद), तेलंगाना के दल , असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी, मायावती की पार्टी और कई अन्य नेता जो न तो राजग के साथ हैं और न ही ‘इंडिया’ गठबंधन के साथ, उन्हें फारूक अब्दुल्ला की तरफ से पत्र मिलेंगे और हमें उम्मीद है कि वे 20 तारीख को हमारे विरोध-प्रदर्शन का समर्थन करेंगे।’’

श्रीनगर के एसकेआईसीसी में मंगलवार को नेकां नेतृत्व और नागरिक संस्थाओं के सदस्यों की हुई बैठक और जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल की मांग करने के समर्थन में पारित प्रस्ताव का उल्लेख करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि नागरिक संस्थाओं ने भी इस मांग को लेकर पार्टी का समर्थन किया है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘ यह केवल एक प्रतिनिधिमंडल नहीं था, बल्कि पूरे समाज की बैठक थी। इसमें नागरिक समाज के अलग-अलग वर्गों के लगभग 170 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें व्यापारिक संगठन, सेवानिवृत्त नौकरशाह, शिक्षाविद और अन्य लोग शामिल थे। बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और सभी ने, बिना किसी अपवाद के, यह रेखांकित किया कि राज्य का दर्जा बहाल करने में पहले ही बहुत देर हो चुकी है।’’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘उन्होंने हमारे जंतर-मंतर कार्यक्रम का समर्थन किया और एक सर्वसम्मत, एक-पैराग्राफ वाला प्रस्ताव पारित कर भारत सरकार से राज्य का दर्जा तुरंत बहाल करने की मांग की।’’

उन्होंने बताया कि आज दिन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे डोडा में भूस्खलन के बाद के हालात को लेकर फोन पर बात की है।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘आज सुबह हमने मौसम की वजह से हुई दिक्कतों, खासकर चिनाब घाटी और कठुआ के हालात के बारे में बात की। गृह मंत्री ने फोन करके हालात के बारे में जानकारी ली। मैंने गृह मंत्री को सारी जानकारी दी और अगर केंद्र से मदद की ज़रूरत पड़ी, तो वह मदद देने के लिए तैयार हैं।’’

अमरनाथ यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित करने के सवाल पर अब्दुल्ला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने आने वाले लोगों की संख्या को लेकर पहले ही सीमा तय कर दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘शिवलिंग’ का पिघलना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह ईश्वर की एक प्राकृतिक रचना है। न तो आप और न ही मैं यह तय कर सकते हैं कि इसे कितने समय तक रहना चाहिए। इस साल यह छह दिनों तक रहा।’’

दक्षिण कश्मीर स्थित पवित्र गुफा मंदिर के शुरुआती पांच दिनों में 1.13 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

सिंधु जल संधि को निलंबित करने पर पाकिस्तान की ओर से युद्ध की धमकी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी ओर से तनाव बढ़ाने की कोई गतिविधि नहीं हुई है।

उन्होंने कहा, ‘‘सिंधु जल संधि कभी भी जम्मू-कश्मीर के लोगों के हित में नहीं थी। हमने शुरू से ही इस संधि का विरोध किया क्योंकि हमारा मानना ​​था कि यह भारत और पाकिस्तान दोनों की ओर से जम्मू-कश्मीर के साथ किए गए सबसे बड़े अन्याय में से यह एक थी, क्योंकि हमारी अपनी नदियों पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं था।’’

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘हमारी तरफ से तनाव बढ़ाने वाली कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संधि को केवल निलंबित किया गया है, जबकि दूसरी तरफ से धमकियां मिल रही हैं। मैं उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे सकता, केंद्र सरकार पहले ही उस (धमकी) पर जवाब दे चुकी है।’’

उन्होंने अमेरिका-ईरान तनाव पर कहा कि युद्ध यथाशीघ्र समाप्त होना चाहिए और शांति कायम होनी चाहिए।

इससे पहले, अब्दुल्ला ने लोकसेवा आयोग (पीएससी) द्वारा प्रवक्ता पद के लिए चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किये। उन्होंने हालांकि कहा कि आजकल पदों को भरने में पहले के मुकाबले अधिक समय लगता है।

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


लेखक के बारे में