प्रयागराज, सात मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भगोड़ा घोषित किए गए आरोपी की अनुपस्थिति में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएनएस), 2023 की धारा 356 के तहत आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए विस्तृत चरण-दर-चरण प्रक्रिया जारी की है।
न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने इस प्रावधान को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ‘अनुपस्थिति में मुकदमा’ की अवधारणा को पेश करने के लिए महत्वपूर्ण करार दिया।
अदालत रवि उर्फ रविंद्र सिंह नामक व्यक्ति द्वारा बीएनएसएस की धारा 528 के तहत दायर आवेदन पर विचार कर रही थी जिसमें उसने आगरा की अदालत द्वारा उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द करने का अनुरोध किया था।
धारा 356 के तहत, यदि कोई आरोपी भगोड़ा घोषित किया गया हो और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहा हो, तो अदालत उसके अनुपस्थिति में भी मुकदमा चला सकती है और फैसला सुनाने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि भगोड़ा घोषित किया गया कोई व्यक्ति मुकदमे से बचने के लिए फरार हो जाता है और उसकी गिरफ्तारी की तत्काल संभावना नहीं है, तो कानूनी रूप से मुकदमे के समय मौजूद रहने का उसका अधिकार समाप्त माना जाएगा।
न्यायमूर्ति गिरि ने तेज न्याय सुनिश्चित करने के लिए ऐसी अनुपस्थिति वाले आरोपी का मुकदमा चलाने और धारा 356 के तहत मुकदमा पूरा करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया। इसके तहत, अदालत आरोपी की भौतिक उपस्थिति के बिना भी सबूत दर्ज कर सकती है, गवाहों से पूछताछ कर सकती है और फैसला सुना सकती है।
भाषा सं राजेंद्र जोहेब
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