उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्तियों में देरी पर सरकार को फटकार लगाई
उप्र: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अल्पसंख्यक आयोग में नियुक्तियों में देरी पर सरकार को फटकार लगाई
लखनऊ, सात जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति में देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव को निष्क्रियता का कारण बताने के लिए 20 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि अगर विभाग में कोई अपर मुख्य सचिव तैनात नहीं है तो उनकी जगह प्रधान सचिव पेश होंगे।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने शम्स तबरेज द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर यह आदेश जारी किया।
याचिका में आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की शीघ्र नियुक्ति पर आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया था।
यह पद 2024 में खाली हो गए थे।
पीठ ने 24 अप्रैल, 2026 को राज्य सरकार को नियुक्ति प्रक्रिया की स्थिति के संबंध में स्पष्ट लिखित निर्देश रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया था हालांकि, सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने केवल मौखिक निर्देश के माध्यम से अदालत को सूचित किया कि अध्यक्ष और सदस्यों को नामित करने की प्रक्रिया अब भी जारी है।
पीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि अदालत के पूर्व के निर्देशों के बावजूद न तो लिखित निर्देश दिए गए और न ही नियुक्तियां की गईं।
पीठ ने राज्य सरकार के इस आचरण को समन्वय पीठ द्वारा पारित पहले के आदेश के प्रति अत्यधिक अपमानजनक बताया।
अदालत ने अपर मुख्य सचिव या प्रधान सचिव को यह बताने का निर्देश दिया कि राज्य सरकार के वकील को लिखित निर्देश क्यों नहीं दिए गए।
मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।
भाषा सं जफर जितेंद्र
जितेंद्र

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