नई दिल्लीः Parliament Monsoon Session लोकसभा में पेपर लीक से जुड़ा ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच ध्वनि मत से पास हो गया। वहीं राज्यसभा में वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला विधेयक पास हो गया। इससे पहले विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेपर लीक से जुड़े बिल पर 50 मिनट स्पीच दी। उन्होंने इडियट और अंधभक्त जैसे शब्द बोले। फिर कहा कि गृहमंत्री ने दिल्ली में छात्रों पर फायरिंग के आदेश दिए। इसको लेकर सत्तापक्ष ने जमकर हंगामा किया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने 7 बार खड़े होकर राहुल को टोका और संसदीय नियम का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष को माफी मांगनी चाहिए। इस पर राहुल ने कहा, ‘अगर आप चाहते हैं कि देश में सिर्फ बीजेपी बोले तो मैं चुप होकर बैठ जाता हूं।’
Parliament Monsoon Session: डॉक्टर जितेंद्र सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने एक कहानी सुनाई। एक कहानी मैं भी सुनाता हूं 21 जुलाई की। ये हताश होकर प्रधानमंत्री के दरवाजे पर जा बैठे। इनकी हताशा हम समझ सकते हैं। बहुत समय से चाहते हैं कि देश की जनता इनको प्रधानमंत्री बनाए, 7 लोककल्याण मार्ग भेजे। जब इनसे कहा गया कि हट जाइए, इन्होंने कहा कि मुझे उठा लिया जाए। उन्होंने असम आंदोलन का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को कठघरे में खड़ा किया। प्रियंका गांधी ने रोचक तथ्य बताया कि 150 से ज्यादा पेपर लीक हुए और 750 करोड़ से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए और कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। शायद वह ये भूल गईं कि 52 एफआईआर दर्ज हुई। वेणुगोपाल ने कहा कि हमने स्कूल बंद कर दिए। वे यह कहते कि उच्च शिक्षा के स्तर पर अवसरों में 30 परसेंट इजाफा हुआ है। हम चाहते तो थे, कि इस बिल पर गंभीर चर्चा हो।
इस दौरान विपक्षी सांसदों ने “जवाब दो, जवाब दो” और “गृह मंत्री जवाब दो” के नारे लगाए, जिससे सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि अगर नेता प्रतिपक्ष ने गंभीर आरोप लगाया है, तो सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई किसके आदेश पर हुई। किरेन रिजिजू ने कहा कि जांच की मांग करना अलग बात है, लेकिन किसी का नाम लेकर सीधे आरोप लगाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने राहुल गांधी से या तो अपने आरोप के समर्थन में सबूत पेश करने या फिर माफी मांगने की मांग की। स्पीकर ओम बिरला ने भी कहा कि इस तरह के आरोप और शब्द सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनने चाहिए और सभी सदस्यों को तथ्यों के आधार पर ही अपनी बात रखनी चाहिए।