‘पंथिक’ सहमति के बिना बेअदबी-रोधी कानून पर आगे न बढ़ा जाए : अकाल तख्त जत्थेदार

‘पंथिक’ सहमति के बिना बेअदबी-रोधी कानून पर आगे न बढ़ा जाए : अकाल तख्त जत्थेदार

‘पंथिक’ सहमति के बिना बेअदबी-रोधी कानून पर आगे न बढ़ा जाए : अकाल तख्त जत्थेदार
Modified Date: August 1, 2026 / 12:00 am IST
Published Date: August 1, 2026 12:00 am IST

अमृतसर, 31 जुलाई (भाषा) अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज के निर्देशों के तहत पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष कुलतार सिंह, राज्य के सिख विधायकों और सिख मंत्रियों को अलग-अलग पत्र भेजकर कहा गया है कि ‘पंथिक’ सहमति के बिना बेअदबी-रोधी कानून पर न तो आगे कोई चर्चा की जाए और न ही उसमें कोई संशोधन किया जाए।

गड़गज ने बृहस्पतिवार को बेअदबी-रोधी कानून के संबंध में पंजाब सरकार के जवाब को ‘‘असंतोषजनक’’ बताते हुए खारिज कर दिया था। उन्होंने इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के साथ बातचीत करने के लिए पांच सदस्यीय समिति के गठन की घोषणा की थी।

गड़गड़ की यह टिप्पणी ‘आप’ विधायक इंदरबीर सिंह निज्जर द्वारा ‘जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के संबंध में अकाल तख्त की ओर से उठाई गई आपत्तियों पर पंजाब सरकार का जवाब सौंपने के एक दिन बाद आई है।

गड़गज ने 29 जून को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह एक महीने के भीतर बेअदबी-रोधी कानून से संबंधित आपत्तियों का समाधान करे।

उन्होंने सभी सिख विधायकों और कैबिनेट मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि तीन अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान अकाल तख्त साहिब और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के साथ इस मुद्दे पर सहमति बनने तक बेअदबी-रोधी कानून पर कोई चर्चा नहीं की जाए और कानून में किसी भी अन्य संशोधन को मंजूरी न दी जाए।

गड़गज के निर्देशों के तहत, पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान, सिख विधायकों और पंजाब सरकार के उन सिख मंत्रियों को अलग-अलग पत्र भेजे गए हैं, जो 29 जून 2026 को अकाल तख्त के समक्ष पेश हुए थे।

अकाल तख्त की ओर से शुक्रवार को जारी बयान के अनुसार, इन पत्रों के माध्यम से पंजाब विधानसभा के तीन अगस्त से शुरू होने वाले सत्र के दौरान ‘जगत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) अधिनियम, 2026’ के संबंध में अकाल तख्त साहिब का पक्ष रखने की धार्मिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही उनसे कहा गया है कि ‘पंथिक सहमति’ बनने तक इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ने दिया जाए।

पत्र में कहा गया है कि विधानसभा सत्र के दौरान अध्यक्ष, सिख विधायक और सिख मंत्री यह सुनिश्चित करें कि जब तक पंजाब सरकार इस मुद्दे पर अकाल तख्त और एसजीपीसी के साथ सहमति नहीं बना लेती, तब तक कानून में किसी भी नये संशोधन को मंजूरी नहीं दी जाए।

भाषा पारुल

पारुल


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