साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज

साइबर धोखाधड़ी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
Modified Date: April 16, 2026 / 06:56 pm IST
Published Date: April 16, 2026 6:56 pm IST

नयी दिल्ली, 16 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने व्हाट्सऐप निवेश योजना के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देने के मामले में एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि बड़ी साजिश का पता लगाने के लिए उसे हिरासत में रखकर पूछताछ करना आवश्यक है।

मामले में आरोप है कि सुमित ने शिकायतकर्ता से निवेश के बहाने पैसे लेकर उसके साथ धोखाधड़ी की।

अदालत ने 10 अप्रैल के आदेश में कहा, “आरोपी को अग्रिम जमानत देना, आरोपी की भूमिका का पता लगाने और पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए जांच के दरवाजे बंद करने जैसा होगा।”

आरोपी के खिलाफ शाहदरा साइबर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(3) (धोखाधड़ी) और 340 (जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल करना) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने कथित तौर पर शिकायतकर्ता को निवेश के बहाने एक व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल किया और अच्छे मुनाफे का वादा करके उससे धन हस्तांतरित करने को कहा।

आरोपी ने अपनी मां के नाम पर पंजीकृत मोबाइल नंबर का उपयोग करके कथित तौर पर ठगी को अंजाम दिया।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरविंदर सिंह ने प्रमुख सह-आरोपियों में से एक के साथ आरोपी के संबंधों और जांच एजेंसी के इस दावे पर भी गौर किया कि अपराध में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड और उपकरणों की बरामदगी लंबित है।

अदालत ने कहा, ‘‘यह ध्यान देने योग्य है कि यह साइबर धोखाधड़ी का मामला है, जहां शिकायतकर्ता को धोखाधड़ी के उद्देश्य से एक व्हाट्सऐप ग्रुप में शामिल होने के लिए प्रेरित किया गया। उसे निवेश के बहाने बड़ी रकम देने के लिए कहा गया। आवेदक की मां का फोन नंबर सक्रिय रूप से व्हाट्सऐप चैट में इस्तेमाल किया गया और वह इस मामले के प्रमुख आरोपियों में से एक से संबंधित है।’’

बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज करते हुए कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और जांच की आवश्यकता नहीं है, अदालत ने कहा कि इस स्तर पर अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित होगी।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस अदालत की राय है कि आवेदक को अग्रिम जमानत देने के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है। इसलिए, याचिका खारिज की जाती है।’’

भाषा

राखी नेत्रपाल

नेत्रपाल


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