सशस्त्र बलों को नेटवर्क केंद्रित अभियानों से हटकर ‘इंटेलिजेंट’ युद्ध की तरफ बढ़ना होगा: सीडीएस चौहान
सशस्त्र बलों को नेटवर्क केंद्रित अभियानों से हटकर ‘इंटेलिजेंट’ युद्ध की तरफ बढ़ना होगा: सीडीएस चौहान
(तस्वीर के साथ)
हैदराबाद, 25 फरवरी (भाषा) प्रमुख रक्षाध्यक्ष (सीडीएस) अनिल चौहान ने कहा है कि जैसे-जैसे युद्ध का विस्तार भौतिक से कृत्रिम और संज्ञानात्मक क्षेत्रों तक हो रहा है, सशस्त्र बलों को नेटवर्क केंद्रित अभियान से ‘इंटेलिजेंट युद्ध’ की ओर बढ़ना होगा, और ‘मल्टी-डोमेन ऑपरेशन’ (एमडीओ) से निकल कर ‘ऑल रिल्म ऑल डोमेन ऑपरेशंस’ (एआरएडीओ) की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे।
‘इंटेलिजेंट युद्ध’ से आशय कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी कई आधुनिक तकनीकी के साथ-साथ कुशल रणनीति पर आधारित युद्ध से है।
रक्षा मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति में उन्होंने परमाणु-रहित रणनीतिक प्रतिरोध स्थापित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिससे हर स्तर पर संघर्ष में जीत हासिल करने की क्षमता सुनिश्चित हो सके।
जनरल चौहान ने 24 फरवरी को ‘कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट’ (सीडीएम) में ‘मल्टी-डोमेन इंटीग्रेटेड टेक्नोलॉजिकली-एम्पावर्ड रेजिलिएंट आर्म्ड फोर्सेज’ (एमआईटीआरए) विषय पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन में अपना उद्घाटन भाषण दिया।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि सीडीएस ने ‘सैन्य मामलों में तीसरी क्रांति’ पर प्रकाश डाला, जिसकी विशेषता विभिन्न प्रकार के हथियारों, रणनीतियों और कौशल का मेल है। यह संघर्ष के सभी स्तरों पर संपर्क और गैर-संपर्क, ‘काइनेटिक’ और ‘गैर-काइनेटिक’, तथा पुराने एवं नए डोमेन को एकीकृत करता है।
काइनेटिक युद्ध के तहत भौतिक हमला आता है, जबकि गैर काइनेटिक युद्ध के तहत सूचना, साइबर, इलेक्ट्रॉनिक पर आधारित अप्रत्यक्ष हमला किया जाता है।
जनरल चौहान ने कहा, ‘‘युद्ध का जैसे-जैसे भौतिक से कृत्रिम एवं संज्ञानात्मक क्षेत्रों तक विस्तारित हो रहा है, भारतीय सशस्त्र बलों को नेटवर्क-केंद्रित अभियानों से हटकर ‘इंटेलिजेंट युद्ध’ की ओर अग्रसर होने और एमडीओ से आगे बढ़कर एआरएडीओ की ओर बढ़ने की आवश्यकता है।’’
सीडीएम ने 24 और 25 फरवरी को हैदराबाद स्थित ‘इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस’ (आईएसबी) की भागीदारी में इस वार्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया।
इस वर्ष का विषय ‘एमआईटीआरए’ तेजी से जटिल होते भू-राजनीतिक और तकनीकी परिदृश्य में सैन्य और युद्ध रणनीतियों की बदलती भूमिका को रेखांकित करता है।
भाषा संतोष रंजन
रंजन

Facebook


